श्रवण कुमार साहू, "प्रखर"
तीजा तिहार के दिन के बात आय,शिवलोक म माता पार्वती ह कार्तिक के संग मोदक,लड्डू बनाय म मगन रिहिस,शंकर भगवान ह पथरा म बैठे-बैठे डमरू के डोरी ल कसत रहिस|इही बेरा म गली खोर ले किंजर के गणेश ह अपन सवारी मुसुवा के संग आइस|झरना के पानी म हाथ,गोड़ धोवत गणेश ह कहीथे,मैय्या कुछु खाय के होहि त देना,मोला अड़बड़ भूख लगत हे|पार्वती मईया ह कुछु बोलतीस वोकर पहिली बड़े भाई कारतिक ह कहीथे, बने खा ले भाई,काबर अवईया दस ग्यारा दिन ले तोला मईया के हाथ के भात साग,अऊ मोदक खाय बर नई मिले, गणेश ह कहिस-काबर,काबर नइ मिलहि?
पार्वती मईया ह बोरे बासी अऊ आमा के अथान परोसत हाँसत-हाँसत कहीथे, हाँ गणेश बेटा तोर कारतिक भईया ह सही तो कहत हे| गणेश ह झट ले कहीथे काबर मईया दस ग्यारा दिन बर तै गाँव जावत हस का?तभे भोले बाबा ह मुस्कात- मुस्कात कहीथे,मईया ह कांहचो
नइ जावत हे गजानन,तै भुला गेस का जी काली गणेश चतुर्थी हरे,तोर भक्त मन बड़े- बड़े मंडप सजा के तोर सुवागत म तैयार खड़े हे|
अतका ल सुन के लंबोदर ह कहीथे पिता जी आप मन कुछु कहो,कुछु करो मेंहा ये बछर धरती लोक म नइ
जावंव,चाहे कुछु हो जाए ( अईसन कहिके गोड़ हाथ पटके ल धर लिस,मारे गुस्सा के ऊंच पथरा म बैठगे) एला देख के मुसुवा ह घलक कहे ल धर लिस, हमू नी जावन,हमू नी जावन चीं चीं चीं|गौरी मईया ह गणेश ल पुचकार के अपन तीर म बलाइस अऊ अपन गोदी म बैठार के पुछीस,का होगे विनायक,तै काबर नी जावव कहिके कहत हस?तोला कोनो दुःख पीरा हे का?तबियत ठीक नी हे का?
गणेश ह खिसिया के कहीथे एक ठीक पीरा रतिस त बतातेंव,किसिम-किसिम के दुःख हे मोर तकलीफ ल मेहा जानहूं( अइसे कहिके गोहार पार के रोवन लागे) छोटे भाई ल रोवत देखिस त कारतिक कहीथे,मोला बता,जेन तोला दुःख देही वोला मैं मजा चखाहूँ|
शिव बाबा ह मुस्कावत कहीथे,शांत हो जा बेटा कारतिक,ले बता गणेश का दुःख हे तोर तेन ल ( बाबू के आसरा पाके वोकर तीर जा के गणेश ह कहीथे) पिता जी
ये धरती लोक के मनखे मन ह भारी अतलंगहा हो गे हे, मोर रूप स्वरूप ल बिगाड़ देथे,किसान,जवान,हनुमान, फाइटर मैन,राम,कृष्ण,साई,जैसन न जाने कतेक रूप धर देथे| अऊ कोनो भी जगा, बीच खोर,चौक,चौराहा,डोंगरी पहाड़ी,बजबजावत नाली, घुरवा,खातू कचरा,खेत खार, झोपड़ी से ले के महल अटारी तक जेकर मन लागथे तेकर बैठार देथे|
शिव बाबा ह मुस्कावत कहीथे,शांत हो जा बेटा कारतिक,ले बता गणेश का दुःख हे तोर तेन ल ( बाबू के आसरा पाके वोकर तीर जा के गणेश ह कहीथे) पिता जी
ये धरती लोक के मनखे मन ह भारी अतलंगहा हो गे हे, मोर रूप स्वरूप ल बिगाड़ देथे,किसान,जवान,हनुमान, फाइटर मैन,राम,कृष्ण,साई,जैसन न जाने कतेक रूप धर देथे| अऊ कोनो भी जगा, बीच खोर,चौक,चौराहा,डोंगरी पहाड़ी,बजबजावत नाली, घुरवा,खातू कचरा,खेत खार, झोपड़ी से ले के महल अटारी तक जेकर मन लागथे तेकर बैठार देथे|
अऊ का बताव मैय्या मुर्ति स्थापना के मुहुरुत् से कोई लेना देना नइ राहे वोमन ल,कोनो-कोनो ह बामहन बुला के बने पूजा कर थे,लेकिन अधिकतर झन ह तो सोझे लेग के बैठार देथे|मोर दुःख ल का कहों भैया मोर पूजा आरती अऊ प्रसादी के कोनो ठिकाना नी रहे,नान-नान लईका मन मोर पुजारी रीथे,सियान अऊ जवान ल कोई लेना देना नी रहे,अऊ कोनो आ भी गे त,पी खा के टुन्न पड़े रहीथे,मोर पंडाल के पाछु म गुटका,डिस्पोजल,बोतल टूटे, फूटे पड़े रहीथे, मोर भोग के का कहिबे कोनो-कोनो दयालु चोला मन एकाध दिन,मोदक,लड्डू,मेवा चढ़ा देथे,बाकी दिन,लायची दाना,फल्ली, मिसरी,पचर्रा खीरा,नइ ते सोझे शक्कर म काम चला दे थे|मोला तो अभी ले टेंसन होगे हे कि,ये बच्छर शक्कर भी मिलही कि नहीं,काबर वोकरो कीमत ह बड़ भारी बढ़ गेहे|
मोर ऊपर अत्याचार होथे वोला मेहा सह भी जथों,लेकिन ये मुसुवा बिचारा ह कोनो-कोनो दिन फल्ली दाना के चक्कर म पंडाल के आघु म चल देथे त लईका, सियान सबो झन दौड़ा-दौड़ा के मारथे|अऊ हद तो तब होथे जब ये देश के नेता मन अरबों,खरबों रुपिया के हजारों टन अनाज ल खा के देश ल खोखला करथे, अऊ भरे विधान सभा म मुसुवा के नाव ले देथे, कतेक दोगला हो गे हे ये नेता मन पिताजी का बतावंव|
मोर ऊपर अत्याचार होथे वोला मेहा सह भी जथों,लेकिन ये मुसुवा बिचारा ह कोनो-कोनो दिन फल्ली दाना के चक्कर म पंडाल के आघु म चल देथे त लईका, सियान सबो झन दौड़ा-दौड़ा के मारथे|अऊ हद तो तब होथे जब ये देश के नेता मन अरबों,खरबों रुपिया के हजारों टन अनाज ल खा के देश ल खोखला करथे, अऊ भरे विधान सभा म मुसुवा के नाव ले देथे, कतेक दोगला हो गे हे ये नेता मन पिताजी का बतावंव|
गणेश जी के अतेक करलई ल सुनिस त माता भवानी गुस्सा के मारे तमतमा के बोलिस,देखे गणेश के बाबू,लईका ल कतेक दुख हे,कोरोना जईसन बीमारी म ले दे बाचे हे,तभो ले ये कलजुगजिहा भगत मन ल होश नइ हे|खपल दों का पूरा धरती ल,तब समझ आहि|
भोलेनाथ ह उमा भवानी ल शांत करके गजानन ल कहीथे,अऊ कोनो समस्या हे का बेटा? मुड़ी हिलाके गणेश जी कहीथे,बाबू जी पहली के मनखे मन जियादा पढ़े लिखे नी रिहिस फेर रोज दिन,भाव,भजन,हरिकीर्तन, रामायण, पंडवानी के सुघर कार्यक्रम करे ग|वो बेरा के भाव भक्ति सहराय के लायक रिहिस| अऊ आज के मनखे कर्मकांड अऊ दिखावा म मरगे|आज के पीढी ह मर गे डी जे के मारे, मोर बिदा करत-करत घलक डी जे मे नाचत गावत आथे जथे,,, कई झन ह दारू म लटालट रहीथे,ये सब चीज ल देख के मोला भारी दुख लागथे| मनखे मन दान पुन करे रहीथे वहु पैसा ल पापी मन पी खा के उड़ा देथे|तुमन कहीं काहो,फेर मेंहा ये बच्छर धरती लोक म बिल्कुल नइ जावंव( अईसन कहिके गजानन जी ह रोवत बैठ गे|
भोलेनाथ ह उमा भवानी ल शांत करके गजानन ल कहीथे,अऊ कोनो समस्या हे का बेटा? मुड़ी हिलाके गणेश जी कहीथे,बाबू जी पहली के मनखे मन जियादा पढ़े लिखे नी रिहिस फेर रोज दिन,भाव,भजन,हरिकीर्तन, रामायण, पंडवानी के सुघर कार्यक्रम करे ग|वो बेरा के भाव भक्ति सहराय के लायक रिहिस| अऊ आज के मनखे कर्मकांड अऊ दिखावा म मरगे|आज के पीढी ह मर गे डी जे के मारे, मोर बिदा करत-करत घलक डी जे मे नाचत गावत आथे जथे,,, कई झन ह दारू म लटालट रहीथे,ये सब चीज ल देख के मोला भारी दुख लागथे| मनखे मन दान पुन करे रहीथे वहु पैसा ल पापी मन पी खा के उड़ा देथे|तुमन कहीं काहो,फेर मेंहा ये बच्छर धरती लोक म बिल्कुल नइ जावंव( अईसन कहिके गजानन जी ह रोवत बैठ गे|
अतका ल देख सुन के भगवान शंकर ह कहीथे देख बेटा;अपन भगत मन के भाव ल समझो,तै कहेस ना मोला कहीँ भी बैठार देथे,त एकर पाछु भगत मन के भाव इही हे कि,गणेश जी सर्वत्र विराजित हो सकत हे|ते कहेस कि, कुछु भी रूप बना देथे,त भगत मन के सोच हे कि,गजानन स्वामी सब रूप म बसे हे|ते कहेस कि,कुछु भी भोग लगा देथे,त एकर पाछु भाव अतकी हे कि,अमीर-गरीब,दीन-हीन,के देवता सिरिफ लंबोदर जी हरे,जेन ह सबके प्रसाद ल पा के सबके आस ल पूरा करथे|अऊ रहा सवाल मंदहा,गंजहा,पापी अऊ बेईमान मन के,, त वोमन कलजुग के प्रभाव में हे,मरे के पाछु हमरे कर आहि,वो बेरा म देख लेबो|
अपन पिताजी के गोठ सुनके, अऊ दाई, भाई के मया पाके गणेश जी अपन सवारी मुसुवा म बैठ के निकल गे,, आशा हे कि,ये समय गणेश जी के कलजुगिहा भगत मन अतलंग नइ करहि----------
बोल गणेश भगवान की जय---
शिक्षक/ साहित्यकार, राजिम गरियाबंद ( छ.ग. )
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