इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

बुधवार, 23 सितंबर 2026

दारू सराब झनिच पिबे

     जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'


दारू सराब झनिच पिबे तैं , दारू म हानि भारी ।
घर कुरिया सब बेंचा जाथे , लोटा  बटकी  थारी ।।१।।
आनी  बानी  रोग   समावै , धर   खाथे  बीमारी ।
डॉक्टर बैगा ठगहीं रुपिया , पुजबे कुकरी कारी ।।२।।
छोड़य नहीं तब ल बीमारी , नोहय गोठ  लबारी ।
पानी कस रुपिया  बोहावै , बृथा  कमाई  सारी ।।३।।
कतको  कमाबे   पूरै  नहीं , बढ़  जाथे  लाचारी ।
भूखन  मरथें   नोनी  बाबू , अंग  संग   के  नारी ।।४।।
कपड़ा लत्ता बर सब तरसैं , परय  सुने  बर गारी ।
कतको परिवार  टूट जाथे , जाथे   भाग  सुवारी ।।५।।
नारी बिन नर  तन हे सुन्ना , अँगना महल अटारी ।
दारू  घर   हे  बरबादी  के , सुन   लेवा  सँगवारी ।।६।।
छोड़व  साथी  दारू  पीना , देखौ मन म बिचारी ।
जिनगी सँवरे 'ठाकुर' बोले , कहना  धरव  हमारी ।।७।।
                    जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
सम्पर्क सूत्र--   बरिष्ठ साहित्यकार }
ग्राम बंजारी  पो.जेवरा ( हरदी )
जि.सारंगढ़-बिलाईगढ़ ( छग )  पिनकोड ४९६४५०

६२६६५२४२६१,९४०६०५७७६३ 

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