इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .
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शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

छत्‍तीसगढ़ राजभाषा आयोग व्‍दारा आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम संपन्‍न






छत्‍तीसगढ़ी '' गरीबा '' महाकाव्‍य के रचनाकार श्री नूतन प्रसाद शर्मा सहित श्रीमती सुभदा मिश्र, 
गिरीश ठक्‍कर, देवचंद बंजारे, श्रीमती पदमा साहू छत्‍तीसगढ़ी में उत्‍कृष्‍ट कार्य के लिए सम्‍मानीत
      डोंगरगढ़ । धर्मनगरी डोंगरगढ़ में 15 अक्‍टूबर 2022 को छत्‍तीसगढ़ राजभाषा आयोग, रायपुर के व्‍दारा जिला स्‍तरीय छत्‍तीसगढ़ी राजभाषा सम्‍मेलन का आयोजन किया गया । मां बम्‍लेश्‍वरी धर्मार्थ चिकित्‍सालय भवन के उपरी भाग में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम के माई पहुना श्री कुंवरसिंह निषाद, संसदीय सचिव एवं विधायक गुण्‍डरदेही थे । पगरइत अतिथि के रुप में श्री भुनेश्‍वर शोभाराम बघेल, अध्‍यक्ष अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, छत्‍तीसगढ़ शासन एवं विधायक डोंगरगढ़ थे । खास पहुना श्री विवेक वासनिक, अध्‍यक्ष, राजगामी सम्‍पदा न्‍यास, राजनांदगांव, श्री नवाज खान, अध्‍यक्ष जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक, राजनांदगांव, मां बम्‍लेश्‍वरी ट्स्‍ट के अध्‍यक्ष श्री मनोज अग्रवाल एवं नगर पालिका,डोंगरगढ़ के अध्‍यक्ष श्री सुरेश मेश्राम थे ।
      कार्यक्रम के आरंभ में मां सरस्‍वती के तैलचित्र में मार्ल्‍यापण कर दीप प्रज्‍जवलित किया गया । तत्‍पश्‍चात राजगीत '' अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार '' गाया गया । 
      कार्यक्रम के आरंभ में स्‍वागत भाषण का वाचन छत्‍तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के सचिव डॉ. अनिल कुमार भतपहरी ने किया । तीन सत्र में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्यिक कारों छत्‍तीसगढ़ी '' गरीबा '' महाकाव्‍य के रचनाकार श्री नूतन प्रसाद शर्मा, श्रीमती सुभदा मिश्र, श्री गिरीश ठक्‍कर, श्री देवचंद बंजारे एवं श्रीमती पदमा साहू का सम्‍मान श्रीफल, साल, मेमोंटों भेंट कर सम्‍मानीत किया गया । 
      माई पहुना की आसंदी से संसदीय सचिव छत्‍तीसगढ़ शासन एवं विधायक गुण्‍डरदेही
श्री कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि छत्‍तीसगढ़ी को जन - जन की भासा बनाने हम कृत संकल्पित है । भूपेश बघेल सरकार इस दिशा में कारगर कदम उठा रही है । पगरईत अतिथि के रुप में उपस्थित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष एवं विधायक डोंगरगढ़ श्री भुनेश्‍वर शाेभाराम बघेल ने छत्‍तीसगढ़ी को राजकाज की भाषा बनाने के संबंध में जोर देते हुए कहा कि छत्‍तीसगढ़ी को राजकाज की भाषा बनाना ही होगा, इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने पूरा प्रयास किया जायेगा । कार्यक्रम को समाजसेवी श्री शोभाराम बघेल, राजगामी सम्‍पदा के अध्‍यक्ष श्री विवेक वासनिक ने भी संबोधित किया । 
      दूसरे सत्र में डां.पीसी लाल यादव, आचार्य सरोज दिव्‍वेदी, श्री आत्‍माराम कोशा एवं श्रीमती शैल शर्मा ने विचार गोष्‍ठी में अपने विचार रखे ।
             कार्यक्रम के तीसरे सत्र में कवि सम्‍मेलन का आयोजन किया गया जिसमें जिले भर के कवि एवं गीतकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्‍तुत की ।

मंगलवार, 2 अगस्त 2022

प्रेमचंद जयंती 2022 : पाठक मंच खैरागढ़

संयोजक -  डॉ. प्रशांत झा

      दिनाँक 31/07/2022 दिन रविवार को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन  की पाठक मंच खैरागढ़ के तत्वावधान में " प्रेमचंद को याद करते हुए 'विषय पर परिचर्चा  सम्पन्न हुई  ।

       परिचर्चा में  डॉ. वीरेन्द्र मोहन ने कहा कि मूलतः उर्दू के लेखक थे। 1905 के आसपास डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का हिन्दी आन्दोलन चल रहा था , उनसे प्रेमचंद जी का पत्र व्यवहार था , पत्र व्यवहार और सम्पर्क के कारण हिन्दी में आए। वे केवल कथाकार ही नहीं,सतत्  वैश्विक दृष्टि वाले पत्रकार थे । उनकी रचनाओं की धुरी राष्ट्र और हासिए का समाज है ,जो नवजागरण का विस्तार करता है । स्वाधीनता आंदोलन में उनका योगदान रचना के स्तर पर था । उस समय उपनिवेशवाद तो था ही, फासीवाद भी उभार पर था ।  चर्चिल को पत्र-पत्रिका के माध्यम से प्रतिकार करते हैं-' संसार में जो कुछ हो रहा है उससे प्रभावित हुए बिना भारत नहीं रह सकता।' इस तरह स्वाधीनता आंदोलन में उनका योगदान रचना के स्तर पर था । विखंडन-विस्थापन की बुनियाद उसी समय की है । अंग्रेजों के भी मजदूर को मजदूर से लड़वाया जाता था । यह जड़ों को खोखला कर रहा है । भविष्य के इन खतरों को प्रेमचंद की रचनाओं में पाते हैं । आज भी यही हो रहा है क्योंकि सत्ता का चरित्र यही है और यह पूंजी कमाने और उसकी सनक से पैदा होती है ,और जब यह सनक बढ़ जाती है तो पूंजीपति सत्ता को नियंत्रित करते हैं । इस हम आज के परिवेश में भी देख सकते हैं । इस तरह की तमाम असमानता की चिंता को प्रेमचंद जी रचनाओं में व्यक्त हुआ देखते  हैं।

       डॉ.जीवन यदु ने कहा कि कोई भी रचनाकार इतिहासकार नहीं है तो वह सफल रचनाकार नहीं हो सकता । प्रेमचंद जी की रचनाएं उस कालखंड की शिलालेख है ।  उस काल को जानने -समझने के लिए प्रेमचंद जी को पढ़ते हैं।आगे कहा कि गाँधीवादी दर्शन कि सरल भाष्य प्रेमचंद की रचनाएं हैं । श्री विनयशरण सिंह ने कहा कि प्रेमचंद जी को याद करते हैं तो सही मायने में साहित्य की आवश्यकता महसूस होती है । ग्रामीण समाज, किसान-समस्या, राष्ट्रीय के स्वर और मनुष्यता का पुजारी आदि हम  प्रेमचंद की रचनाओं  में  पाते हैं ।

        श्री टी.के.चंदेल ने कहा कि प्रेमचंद जी को याद करते हैं तो ग्रामीण परिवेश को पाते हैं और अपने आसपास को पाते हैं। डॉ.प्रशांत झा ने कहा कि उन्हें याद करते हुए तब का और अब का  ,पूरे मानव समाज को  देखना होता है । उनके समय अंग्रेज बहादुर कम्पनी ही थी,आज तो कम्पनी-कम्पनी है। इसे देखते हुए लगता है कि व्यवस्था चाहे जो भी हो ,प्रेमचंद जी याद आते रहेंगे।
        श्री यशपाल जंघेल ने कहा कि प्रेमचंद जी को याद करते हैं तो लगता है कि उन्हें पढना कितना जरूरी है।आज इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यंत्र बदल गए हैं,पर तंत्र है । श्री संकल्प यदु ने कहा कि प्रेमचंद जी को याद करते हैं तो भारत का स्वरूप याद आता है । हम अपने बारे सोचते हैं क्योंकि उनके पात्र में हमारा आसपास  जीवित हो उठता है। उनको पढ़ते हुए हम अपने आप को अकेला नहीं पाते,बल्कि अपना विस्तार पाते हैं।

      श्री अनुराग तुरे ने कहा कि प्रेमचंद जी को याद करते हैं तो उनके विचार याद आते हैं और विचारों से जीवन चलता है। इस तरह वे समसामयिक और प्रासंगिक बने हैं । श्री विप्लव साहू ने कहा कि वे आधुनिक काल के युगपुरुष की तरह याद आते हैं । भारतीय जनमानस की बातों को उनकी रचनाओं में पाते हैं। जितना उनको पढ़ते हैं ,उतनी ही समाज की परतें खुलती है । श्री रवि यादव ने कहा कि उनको याद करते हैं तो लगता है कि वे तीसरे नेत्र वाले व्यक्ति थे जिनका तीसरा नेत्र खुल चुका था । श्री बलराम यादव ने कहा कि प्रेमचंद जी  शोषित वर्ग के पक्षधर के रूप में याद आते हैं ।

        
इस आयोजन में श्री सुविमल श्रीवास्तव , श्री दूजराम साहू ने अपनी उपस्थिति दी । कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत झा और श्री संकल्प यदु ने आभार प्रदर्शन किया ।     


रविवार, 26 दिसंबर 2021

कोलकाता में अशोक अंजुम को मिला "काव्य-वीणा सम्मान"

 कोलकोता। गत दिवस भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता के भव्य सभागार में कवि श्री अशोक 'अंजुम' को उनके दोहा- संग्रह "प्रिया तुम्हारा गांव" के लिए अखिल भारतीय परिवार-मिलन संस्था द्वारा सन् 2020 के "काव्य वीणा सम्मान" से अलंकृत किया गया। सम्मान के अंतर्गत् ₹51000 /-(इक्यावन हज़ार रुपए) शॉल, स्मृति-चिह्न, अभिनंदन-पत्र, उत्तरीय, श्रीफल आदि सम्मान-स्वरूप प्रदान किए गए। इस अवसर पर 2021 के काव्य वीणा सम्मान से कवि श्री जयकुमार रुसवा को उनकी पुस्तक "मन की पीर" के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती शोभा चूड़ीवाल की सरस्वती वंदना से हुआ, तत्पश्चात् डॉ. राजश्री शुक्ल ने पुस्तक-चयन-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए श्री अशोक अंजुम के दोहा वैशिष्ट्य को रेखांकित किया और उनके अनेक दोहे सुनाए। संस्था के सचिव श्री संदीप अग्रवाल ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। श्री ईश्वरी प्रसाद टांटिया ने प्रशस्ति-पत्र वाचन करके उसे श्री अंजुम को भेंट किया। संस्था के संस्थापक श्री अरुण चूड़ीवाल ने आकर्षक स्मृति-चिह्न भेंट कर अशोक अंजुम को सम्मानित किया। इस अवसर पर कवि श्री अशोक अंजुम ने अपने लगभग आधा घंटे के वक्तव्य और काव्य-पाठ द्वारा उपस्थित विद्वत जनों के समक्ष प्रमाणित कर दिया कि वे इस काव्य-वीणा सम्मान के सर्वथा योग्य हैं ‌। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्वान साहित्यकार डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कवि अशोक 'अंजुम' की रचनाधर्मिता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। संचालन वरिष्ठ कवि, नाटककार श्री राजेंद्र कानूनगो ने किया। इस अवसर पर कवि श्री अंजुम की पत्नी कवयित्री श्रीमती भारती शर्मा को भी उत्तरीय पहनाकर सम्मानित किया गया। डॉ. ऋषिकेश राय, श्री विजय झुनझुनवाला, श्री रावेल पुष्प, कवि रवि प्रताप सिंह, श्रीमती आशा राज कानूनगो, श्री विजय अत्रि, अंजू गुप्ता, विनीता मनोत, अमित मूंधड़ा, श्री योगेन्द्र गुप्ता, श्री बंशीधर शर्मा, अरुण मल्लावत, महावीर बजाज, सुरेश चौधरी आदि बड़ी संख्या में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर अर्थात् एक दिन पहले श्री अशोक 'अंजुम' के सम्मान में श्री अरुण चूड़ीवाल ने अपने बंगले के विशाल, खूबसूरत प्रांगण में काव्य-संध्या का आयोजन भी किया जिसमें लगभग एक घंटा श्री अंजुम ने अपने गीत, ग़ज़ल, दोहे और हास्य-व्यंग्य कविताओं का पाठ करके उपस्थितजनों को आह्लादित किया।

सोमवार, 13 दिसंबर 2021

आलीवारा में आयोजित साहित्‍यकार सम्‍मान में सम्‍मानित हुए साहित्‍यकार

     राज्‍य ग्रामीण एवं अन्‍य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष एवं डोंगरगांव विधायक दलेश्‍वर साहू के निवास आलीवारा में '' अभिव्‍यक्ति '' एक आयाम कार्यक्र्म आयोजित कर लगभग 150 साहित्‍यकारों को साल पेन डायरी एवं मां सरस्‍वती की मेमोंटों देकर सम्‍मानित किया गया। जिन साहित्‍यकारों को माननीय विधायक दलेश्‍वर साहू एवं उनकी धर्मपत्‍नी जयश्री व्‍दारा सम्‍मानित किया गया उसमें प्रमुख साहित्‍यकार छत्‍तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव डॉ अनिल भतपहरी, डॉ जीवन यदु राही, डॉ पीसीलाल यादव, राहुलसिंह, डॉ जय प्रकाश साव, भूपेन्‍द्र साहू,राकेश तिवारी, आचार्य सरोज व्दिवेदी, कुबेर साहू, कृष्‍णा श्रीवास्‍तव गुरु जी, शत्रुहन सिंह राजपूत, वीरेन्‍द्र बहादुर सिंह, सूर्यकांत मिश्रा, मुन्‍ना बाबू, संकल्‍प यदु, सुरेश सर्वेद शर्मा, पवन जैन प्रेमी, ओमप्रकाश साहू का नाम शामिल है।

          कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्‍यकार लखनलाल
साहू, वीरेन्‍द्र तिवारी वीरु एवं मधु बघेल ने की।

मंगलवार, 30 नवंबर 2021

सांच कहे तो मारन धावै : इतिहास रचेगा - रवि श्रीवास्तव

पुस्तक विमोचन एवं चर्चा संगोष्ठी में साहित्यकारों ने खुलकर की बात

       राजिम। सन्1912 में छत्तीसगढ़ी में पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा रचित ’ दानलीला’ प्रकाशित हुई जिसने राजिम को साहित्य की दुनिया में स्थापित कर दिया। उसके बाद ’ सच कहे तो मारन धावै’ निबंध संग्रह इतिहास रचेगा। इसमें नए किस्म का शिल्प है। वैसे भी किताब से भविष्य को आशा मिलती है। साहित्यकार रास्ता दिखाने का काम करते हैं। राजिम में पंडित सुंदरलाल शर्मा से लेकर पुरुषोत्तम अनासक्त, पवन दीवान, कृष्णा रंजन, छबिलाल आशांत, मनहरण दुबे जैसे अनेक साहित्यकार हुए जिनकी लेखनी मार्गदर्शन का काम कर रही हैं। वर्तमान में भी यहां अनेक साहित्यकार है तथा साहित्य समिति बनी हुई हैं जिनके माध्यम से निरंतर भाषा प्रगाढ़ ही रही हैं। उक्त बातें शहर के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सभागृह में आयोजित पुस्तक विमोचन एवं चर्चा संगोष्ठी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के आसंदी से छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, भिलाई ने व्यक्त किए। 
         उन्होंने राजिम के साहित्यिक विकास पर फोकस किया तथा एक - एक साहित्यकारों का नाम लेकर उन्हें याद किया। उल्लेखनीय है कि प्रयाग साहित्य समिति के तत्वावधान में आयोजित लेखक दिनेश चौहान कृत निबंध संग्रह ’ सांच कहे तो मारन धावै’ का सर्वप्रथम मां सरस्वती की पूजा अर्चना  के साथ विमोचन हुआ पश्चात चर्चा संगोष्ठी में अतिथियों के अलावा विद्वान वक्ताओं ने अपने विचार रखें। अपने स्वागत भाषण में दिनेश चौहान ने कहा कि मातृभाषा के प्रति प्रेम झलकना चाहिए। छत्तीसगढ़ी हमारी महतारी भाखा है इसलिए मंच पर आयोजित हर कार्यक्रम छत्तीसगढ़ीमय होना चाहिए। इसीलिए उन्होंने अपनी बात छत्तीसगढ़ी में कही। किताब में चार खंडों में बात रखी गई है। जिसमें एक पूरा खंड कोरोना के दूसरे पक्ष पर केंद्रित हैए जिस पर पाठकों से विशेष ध्यान चाहा गया है। इससे पाठक निश्चित रूप से लाभान्वित होंगे। 
       कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दुर्ग से आए प्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद साव ने कहा कि भाषा के प्रति काम  और समर्पण समृद्धि की निशानी है। आप हम सभी लोगों को छत्तीसगढ़ी में खूब काम करने की जरूरत है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री की जयंती बाल दिवस को याद करते हुए उन्होंने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के कथन को उद्धृत कियाए पंडित जवाहरलाल नेहरू अगर राजनीतिज्ञ नहीं होते तो वह विश्व के महानतम कवि होते। उन्होंने दिनेश चौहान के आग्रह से सहमत होते हुए कहा कि दिनेश चौहान को सुनो मत, दिनेश चौहान को पढ़ो।
         विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ ग्रामोद्योग मंडल के सदस्य हेमंत देवांगन पाटन ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजिम के कार्यक्रम में पहली बार सम्मिलित हुआ हूं। यह धर्म धरा है जहां खुद भगवान विष्णु राजीवलोचन के रूप में विराजमान है। जब मैं छोटा था तो अपने माता - पिता एवं दादा दादी के साथ बैलगाड़ी में राजिम आते थे और एक सप्ताह तक रुककर राजिम मेला का आनंद लेते थे। यहां संस्कृतियों का आदान - प्रदान होता है। जिस तरह से तीन नदियों का संगम है उसी तरह से यहां साहित्य, संस्कृति एवं धर्म का संगम देखने को मिलता है। अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित जिला रत्नांचल साहित्य परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र साहू ने कहा कि इस पुस्तक के लेख हालांकि हिंदी में है। परंतु छत्तीसगढ़ी को भी इसमें स्थान दिया गया है। इनके शीर्षक समाज में फैली विसंगति पर सीधा प्रहार करती हैं।
        प्रयाग साहित्य समिति के अध्यक्ष टीकमचंद सेन ने कहा कि यह निबंध संग्रह सच्चाई को उजागर करती है। इसमें लिखित प्रत्येक सामग्री पठनीय है। इसे लिखने में बहुत मेहनत लगी होगी लेकिन पढ़ने में बहुत सरलता है। यही इसकी खासियत है। धमतरी से पहुंचे वरिष्ठ अतिथि व्याख्याता सुबोध देवांगन ने सहज दिनचर्या की चिंता पर अपनी बात रखी। आगे उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सच बोलने के लिए कलेजा एवं साहस होना चाहिए जो दिनेश चौहान के इस निबंध संग्रह में देखने को मिला है। उनमें क्षेत्रीय अस्मिता के प्रति लगाव कूट - कूट कर भरी हुई है। अपने आधार वक्तव्य में मगरलोड से पहुंचे वीरेंद्र सरल ने कहा कि इस पुस्तक में सकारात्मक विचार हैं और इनके माध्यम से समाज में बदलाव आते हैं। वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण देखने को मिलता है। निबंधों में पूरी प्रमाणिकता के साथ चौहान ने अपनी बात रखी है तथा महतारी भाषा को उचित सम्मान दिया गया है और अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।
        कन्या उच्च. माध्य.विद्यालय के व्याख्याता और गीतकार, गायक डॉ. संतोष शर्मा ने गीत राजीवलोचन नाम है राजीव जी का धाम है। प्रस्तुत कर समां बांधा। शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर,संतोष सेन,सरोज कंसारी,विकास शर्मा,नूतन साहू ने कविता प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि एवं साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल ने किया।
          इस मौके पर प्रमुख रूप से छ.ग.प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संगठन मंत्री पथिक तारक, सालिक राम शर्मा, व्यास नारायण चतुर्वेदी, आर एन तिवारी, राजेंद्र मनु, कैलाश श्रीवास्तव, कल्याणी कंसारी,तुकाराम कंसारी,नागेंद्र निषाद, ंफनेन्द्र मोदी, विजय कश्यप, दीप भोज साहू, अवध राम साहू, धर्मेंद्र ठाकुर, संजय सोनी, सुरेश कंडरा, कोमलराम पटेल, सुदर्शन, लक्ष्मीकांत, शिवकुमार,सुमीत, प्रमोद, पुलकित, चुन्नीलाल, शांता, अक्षतख् नैऋत ताम्रकार आदि अनेक लोग उपस्थित थे। आभार प्रकट निशांत चौहान ने किया।

राज्य स्तरीय सम्मेलन भिलाई में आयोजितः सैंकड़ों साहित्यकार पहुंचे

ओमप्रकाश साहू ’ अंकुर’

       छंद के छ के संस्थापक अरुण कुमार निगम के मार्गदर्शन म दीपावली मिलन समारोह ये बखत लोहा के नगर भिलाई म आयोजित करे गिस। कोरोना के सेति पाछू बरस ये आयोजन नइ हो पाय रीहिस तेखर सेति हमर छंद परिवार म ये आयोजन के गजब अगोरा रीहिस हे। आभासी दुनियां ले हट के आमने - सामने भेंट होय ले जउन प्रेम,भाई,चारा,सद्भाव के भावना ह सजोर होथे वोहा ऑनलाइन म सम्भव नइ हे।
       मेहा छंद के छ परिवार म पाछू दू बरस ले जुड़े हवँ। कोरोना के दौर म सत्र -12 के साधक के रुप म जुडेंव। छंद के स्थापना दिवस समारोह अउ दीपावली मिलन समारोह के बारे म फेसबुक अउ कुछ व्हाट्सएप ग्रुप म समाचार पढ़व। जब छंद के छ परिवार ले जुड़ेंव त छंद के छ खुला मंच के माध्यम ले स्थापना दिवस अउ दीपावली मिलन समारोह के बारे म पोस्ट पढ़ के अउ आयोजन के वीडियो देख - सुनके मन म गजब उछाह रहय कि अब अवइया बेरा म महू ह कार्यक्रम म शामिल होंहू। अउ मौका मीलिस कार्तिक पूर्णिमा के सुग्घर बेरा म 19 नवंबर 2021 भिलाई म जाये के। इहां के आयोजन म शामिल होय बर मेहा अउ भाई अमृत दास साहू ह दू दिन पहिली ऑनलाइन टिकिट बुक करायेन। जब 19 नवंबर के डोंगरगढ़ रेल्वे स्टेशन पहुँचेन त पता चलिस कि हमर ट्रेन ह 9.20 के जगह 11 बजे आही। हमर दूनों के मति छरियागे काबर कि सही समय म कार्यक्रम म पहुँचे के इच्छा रीहिस हे। पर कुछू उपाय नइ रीहिस हे अउ ट्रेन के अगोरा करत प्लेटफार्म म बइठ गेन पर धियान ह भिलाई म रहय। खुला मंच म सब झन के पहुंचे के खबर ल पढ़ के मन ह अधीर हो जाय कि हमन ल देरी होगे। देरी के सूचना ग्रुप म घलो सेन्ड करेंव।
        दुर्ग स्टेशन म उतरे के बाद ऑटो करके भिलाई के सेक्टर 7 म स्थित कूर्मि भवन पहुंचेन जिहां खूबचंद बघेल सभागार म ये आयोजन ह चालू होगे रीहिस हे। हाथ मुंह धोके स्वल्पाहार करेन। इही समय श्री बलराम चन्द्राकार जी के सुग्घर धरती वंदना चलत रीहिस हे। इही जगह श्री विजेन्द्र चंद्राकर श्री अश्वनी कोसरे मन ले भेंट होइस। नाश्ता करे के बाद जब ऊपर हॉल पहुंचेन त अतिथि मन के सुग्घर स्वागत - सत्कार चलत रीहिस हे। गरिमामयी मंच म माई पहुना के रुप म आदरणीय सुरेश देशमुख प्रथम उद्घोषक चन्दैनी गोंदा उपस्थित रीहिस अउ पगरईत करत रीहिस हे आदरणीय पिपरिया जी, अध्यक्ष कूर्मि समाज भिलाई नगर। विशिष्ट अतिथि के रूप म शायर डॉ. शाद बिलासपुरी,सरला शर्मा, अध्यक्ष जिला हिन्दी साहित्य समिति दुर्ग,अरुण कुमार निगम संस्थापक, छंद के छ, सुधीर शर्मा, विभागाध्यक्ष, हिन्दी कल्याण कॉलेज भिलाई के गरिमामयी उपस्थिति रीहिस हे। अतिथि मन के स्वागत आयोजन समिति आयोजन समिति के श्री बलराम चन्द्राकार श्री विजेन्द्र वर्मा श्री गजराज दास महन्त, श्री नारायण चंद्राकार,श्री घनश्याम सोनी,श्री चोवा राम वर्मा बादल,श्री दिलीप वर्मा,आशा देशमुख,श्री अजय साहू अमृतांशु, श्री जितेन्द्र वर्मा,खैरझिटिया,श्री ईश्वर साहू आरुग,शशि साहू, सुश्री प्रिया देवांगन,नीलम जायसवाल,श्री उमाकान्त टैगोर,मिलन मलरिहा, अश्वनी कोसरे, श्री मनीराम साहू मितान, श्री महेन्द्र कुमार बघेल मधु श्री राम कुमार चंद्रवंशी सहित अन्य साधक मन करीस।
       ये कार्यक्रम म 90 छंद साधक सहित सैकड़ों साहित्यकार सम्मिलित होइस।  छंद के छ के माध्यम ले 200 छंदकार तैयार हो चुके हे। श्री अरुण निगम ह अपन स्वागत भाषण म छंद के छ गठन करे के उद्देश्य बताय के सँगे सँग बताइस कि पाछू पांच बरस म 17 छंद सत्र के माध्यम ले अब तक 200 छंदकार तैयार हो चुके हे। छंद के छ के गठन 9 मई 2016 अक्ती के दिन करे गे रीहिस हे। किताब के रुप म छंदकार श्री चोवा राम वर्मा बादल के ’ छंद बिरवा’ श्री मनी राम साहू मितान के खंड काव्य’ हीरा सोनाखान के’ जगदीश साहू हीरा के संपूर्ण रामायण, श्री राम कुमार चंद्रवंशी के छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह ’ छंद झरोखा’ प्रकाशित होय के बाद साहित्य जगत म प्रशंसित होइस हे। छंदकार मन के किताब के विमोचन होइस।
       छंद के छ के राज्य स्तरीय सम्मेलन म छंद के छ परिवार ले तीन झन वरिष्ठ छंदकार मन के किताब विमोचित होइस। श्री बोधन राम निषाद, लोहारा,कबीरधाम के छत्तीसगढ़ी किताब ’ अमृत ध्वनि’ (छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह)श्री जगदीश हीरा साहू के (छत्तीसगढ़ी छन्द संग्रह )’ छंद संदेश’ इंद्राणी साहू साँची के हिन्दी किताब ’ साँची साधना’(छंद संग्रह)के विमोचन सम्मानीय अतिथि मन करिस। बोधन राम निषाद के अमृतध्वनि ह छत्तीसगढ़ी म अमृतध्वनि छंद के पहिली किताब हे। येमा 174 ठक अमृतध्वनि छंद हे। वरिष्ठ छंदकार ज्ञानुदास मानिकपुरी ह अमृतध्वनि छंद के प्रस्तावना के वाचन करिस जेला निगम ह लिखे हे। जेमा छंद के नियम उपर जादा प्रकाश करे गिस। श्री जगदीश हीरा साहू ( कड़ार,भाटापारा, बलौदाबाजार) के तीसरा छंद संग्रह ’ छंद संदेस’ के उपर वरिष्ठ छंदकार श्री मनीराम साहू मितान ह प्रकाश डालिस। ये किताब म 54 प्रकार के छंद के समावेश हे। जगदीश हीरा येमा दोहा के 23 प्रकार म छंद लिखे हे।
        इही प्रकार ले सत्र 12 के छंद साधिका श्रीमती इन्द्राणी साहू सांची के हिन्दी किताब म 255 प्रकार के छंद म लेखन करे गेहे। श्री निगम द्वारा लिखित प्रस्तावना ल वरिष्ठ छंदकार श्री कन्हैया साहू अमित ह वाचन करिस। तीनों रचनाकार ह अपन प्रतिनिधि रचना के पाठ करिन। तीनों रचनाकार के सम्मान करे गिस। उपस्थित अतिथि अउ छंद परिवार के साधक मन तीनों रचनाकार ल गाड़ा गाड़ा बधाई अउ शुभ कामना दिन।
        किताब के विमोचन के बाद चयनित छंदकार मन के काव्य पाठ अतिथि मन के सामने होइस। जेमां अजय साहू अमृतांशु,श्री जितेन्द्र कुमार वर्मा,श्री उमाकान्त टैगोर, श्री मनी राम साहू मितान, चोवा राम वर्मा बादल, आशा देशमुख,श्री दिलीप वर्मा, कौशल साहू, ज्ञानु दास मानिकपुरी, सुखदेव सिंह अहिलेश्वर, मिलन मलरिहा अउ अन्य मन अपन काव्य पाठ ले करिन। दूसरा सत्र चालू होइस। अतिथि मन के उद्बोधन होइस। सुरेश देशमुख ह अपन विचार रखत कीहिस कि छंद लिखना छोटे काम नोहे। येमा गजब मिहनत लगथे, अउ छंद के छ सँगवारी मन छंद लिखे बर जउन साधना करत हवव वोहा बहुत सराहे के योग्य हे। येखर बर छंद के छ के संस्थापक निगम जी के सँगे - सँग सबो साधक मन ल बधाई देवत हवँ। श्री पिपरिया ह कहिस कि छंद के छ के आयोजन ल देख सुनके हिरदे ह झूम गेहे। ये कार्यक्रम ह छत्तीसगढ़ी भाखा बर मील के पत्थर साबित होही। शाद बिलासपुरी ह अपन विचार रखत कहिस कि छंद के छ परिवार म बहुत बढ़िया अनुशासन हे। निगम जी छंद के छ के माध्यम ले रेगिस्तान म फूल खिलाय के काम करत हे। येकर माध्यम ले गुरु - शिष्य परंपरा ल जीवित रखे हे जेकर जतकी तारीफ करन कम होही। सरला शर्मा ह कहिस कि हमर देश म छंद लिखे के परंपरा बहुत पुराना हे। कबीर,तुलसी, रहीम के छंद जन - जन म लोकप्रिय हे। निगम जी ह जउन चीज हे तेला छत्तीसगढ़ के युवा साहित्यकार मन म ज्ञान बांट के सुग्घर कारज करत हे। निगम जी के प्रयास ह बहुत सराहनीय हे। डॉ. सुधीर शर्मा ह कहिस कि निगम जी ह निःस्वार्थ भाव ले साहित्य के सेवा करत हे। छंद के छ ह एक आंदोलन के रुप ले चुके हे। येकर माध्यम ले छत्तीसगढ़ी म सुग्घर सृजन के काम होवत हे।
         कार्यक्रम स्थल म हमर राजनांदगांव ले महेन्द्र कुमार बघेल ’ मधु’ राम कुमार चन्द्रवंशी, शेर सिंह गोड़िया आदिवासी, पदमा साहू, राज कुमार चौधरी,नंद किशोर साव ’ नीरव’ रमेश कुमार मंडावी, दूज राम साहू उपस्थित रहिन।

रविवार, 12 अप्रैल 2020

विदेश से एक जनवरी 2020 के बाद आने वाले व्यक्तियों की जानकारी देना

  • जानकारी नहीं देने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध होगी दण्डात्मक कार्रवाई
          राजनांदगांव । कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विदेश भ्रमण से आए एवं संदेहास्पद मरीजों की सतत् मॉनिटरिंग एवं सेम्पल एकत्र कर जांच के लिए भेजा जा रहा है। साथ ही 28 दिन का आइसोलेशन के लिए कहा गया है। मानिटरिंग रेपिड रिस्पांसए कांटेन्ट सर्वे एवं सामुदायिक सर्वे भी टीम द्वारा की जा रही है।
            मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि 1 जनवरी से 31 जनवरी तक जिले के ऐसे निवासी जो विदेश भ्रमण से आए हैं, उन्हें अपनी जानकारी (नाम, उम्र, लिंग, विदेश भ्रमण किए गए देश/ शहर का नाम, विदेश से आने का दिनांक, आधार नंबर, पासपोर्ट नंबर, हवाई यात्रा का विवरण, वर्तमान में आपके लक्षण बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ) देनी होगी। जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय जिला राजनांदगांव गुरूद्वारा के सामने स्वयं उपस्थित होकर हेल्प डेस्क में 13 अप्रैल 2020 तक अनिवार्य रूप से दें। यदि आपके द्वारा किसी भी प्रकार की जानकारी छुपाई जाती हैं तो आपके विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री श्रीमती भेंड़िया ने जरूरतमंदों को छाछ वितरण के लिए वाहन को दिखाई हरी झण्डी

  • गर्मी में काम में लगे पुलिस कर्मियों, सफाई कर्मियों, मजदूरों और
  • जरूरतमंद 30 हजार लोगों तक राहत  पहुंचाने का प्रयास
       रायपुर 12 अप्रैल 2020 । महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने आज राजधानी के राजातालाब स्थित अपने निवास से बढ़ती हुई गर्मी को देखते हुए काम में लगे पुलिस कर्मियों, सफाई कर्मियों, मजदूरों, निराश्रित और जरूरतमंदों 30 हजार लोगों को छाछ वितरण के लिए वाहन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन राजधानी के सभी वार्डों में मसाला छाछ का वितरण करेगा जिससे लोगों को गर्मी में राहत मिल सके। इसकी शुरूआत श्रीमती भेंड़िया ने अपने निज स्टॉफ में लगे पुलिस कर्मियों और आस-पास के कर्मियों को छाछ बांट कर की। व्यवसायी और समाज सेवी श्री शुभम अग्रवाल ने वितरण के लिए 30 हजार छाछ के पैकेट उपलब्ध कराए हैं। इस अवसर पर नगरनिगम के सभापति और पूर्व महापौर श्री प्रमोद दुबे भी उपस्थित थे। 
 श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान गर्मी में पुलिस कर्मी, सफाई कर्मी सहित कई लोग काम में लगे हैं। इनके साथ दूसरे प्रदेशों और राज्य के कई मजदूर भी लॉकडाउन के कारण राजधानी में रह रहे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा नगर निगम,जिला प्रशासन और समाज सेवी लोगों की मदद से जरूरतमंद लोगों को गर्म भोजन का लगातार वितरण किया जा रहा है। गर्मी बढ़ने के कारण काम में लगे लोगों के साथ बेघर और जरूरतमंद लोगों तक छाछ का वितरण किया जा रहा है। छाछ में काली मिर्च और जीरा जैसे मसाले होने से यह गर्मी में राहत देने के साथ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहेगा। उन्होेंने कहा कि वैश्विक कोरोना महामारी के कठिन समय में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए छत्तीसगढ़ में समाज सेवी बढ़-चढ़कर कर मदद कर रहे हैं,यह बहुत खुशी और गौरव की बात है।
 रायपुर नगर निगम के सभापति और पूर्व महापौर श्री प्रमोद दुबे ने कहा कि समाज कल्याण मंत्री श्रीमती भेंड़िया के निर्देशन में निगम प्रशसन के द्वारा लगातार जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहंुचाया जा रहा है। राजधानी के सभी 70 वार्डों में भोजन के साथ इन छाछ के पैकेटों का वितरण भी किया जाएगा। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां मुख्यमंत्री निवास में मंत्रीगणों और अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई...

रायपुर, 12 अप्रैल 2020 ।इस बैठक में मंत्रिपरिषद के सदस्य और अधिकारीगण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। 
बैठक में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉक डाउन बढ़ाने के मद्देनजर विभिन्न विभागों के कार्यो की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करने, कृषि से जुड़ी तैयारियों,पेयजल की स्थिति की समीक्षा की।साथ ही उन्होंने सड़क-पुल पुलियों के कार्य प्रारम्भ करने के निर्देश दिए।  
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से ली गई । इस बैठक में मुख्य सचिव श्री आर पी मंडल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती मनिंदर कौर द्विवेदी, खाद्य सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह, उप सचिव श्रीमती सौम्या चौरसिया सहित विभिन्न विभागों के सचिव भी उपस्थित थे।