सुवा गीत हमर छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकगित मन म एक आए। छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य, सुवा नृत्य:-
थोरकुन जानकारी:-
सुवा गीत ह हमर राज्य के गोंड जाति के माईलोगन मन के नृत्य आए। आज सबो जाति के कन्या मन अउ महिला मन ए नृत्य ल करथे। एहा देवारी के परब म माईलोगन मन के द्वारा गाए जाने वाला गीत है।
कईसे नाचथें सुवा नृत्य ल आवव जानन:-
धान लुवई के बेरा म ए लोकगीत ल अड़बड़ उत्साह के संग म गाए जाथे। एमा शि्व पार्वती के(गउरा गउरी) के बिहाव तको मनाये जाथे। माटी के गउरा गऊरि बनाके एकर चारों मुड़ा म घुमके सुवा गीत गाके नाचे के परम्परा हे।कुछ कुछ जगा म माटी के सुवा बनाके ए गीत ल गाए जाथे।
कब चालू होथे ए गीत ह आवव जानन:-
सुवा गीत ह देवारी के कुछ दिन पहिली चालू होथे अऊ देवारी के दिन ईसर गउरी गऊरा के बिहाव के संगे संग समाप्त हो जाथे। पुराना जमाना ले गाए जाने वाला ए गीत मउखिक हे। सुवा गीत म स्त्री मन बाँस के टुकनी म भरे धान के ऊपर म सुवा के प्रतिमा ल रख देथे।अउ एकर चारों डाहन गोल भाँवर होके नाचथे अउ गाथे। बाँस ले बने टुकनी ल जेन म धान अउ सुवा ल रखे रहिथे, ओला बोहइया ल सुग्गी केहे जाथे।
तरी हरि नाना मोर तरी हरि नाना वो सजगे मरार कुंवा बाढ़ी ।
कुंवा बाढ़ी म आगे दीदी किसम किसम के तरकारी।
सुवा गीत देवारी तिहार के बेरा म गाए वाला गीत हरय, अउ देवारी तिहार आते ही जुड़ मउसम चालू हो जाथे। अउ इही मउसम में ही मरार बाढ़ी ले रंग रंग के साग भाजी निकलथे। उही ल ए सुवा गीत म काहत हे- तरी हरि नाना मोर तरी हरि नाना वो सजगे मरार कुंवा बाढ़ी ।
कुंवा बाढ़ी म आगे दीदी किसम किसम के तरकारी।
त का का साग ए मरार कुंवा बाढ़ी म निकलथे तेकर सुघ्घर वरनन ए सुघ्घर सुवा गीत के माध्यम ले लाईन वार जानबोन।
कुंदरू साग अउ करेला-
कुंदरू करेला नार बियार वाले साग हरय, त ए साग बर ढेखरा गढ़ियाय बर लागथे । कुंदरू करेला के सुघ्घर वरनन ए सुवा गीत म देखेंब मिलथे।
ढेखरा म झुलत कुंदरू ल देखय त करू करेला बिजरावय।
ए सबो जिनिस ह साग मन के प्रमुख सहायक सब्जी आए एकर बिना साग रांधे के कल्पना हम छत्तीसगढ़ीया मन कर ही नई सकन। बंगाला ह अइसे फरे रहिथे भिंया म जईसे भुंईया म जठना जठाए हे। धनिया के सुगंध जबदस्ती सुघ्घर रहिथे अउ धुरीहा के एकर सुगंध आ जाथे।
मिर्चा ले तीरे तीर बपूरी बंगाला ह भुंईया म जाठना जठावय।
ममहावय वो दीदी मोर धुरिहा ले धनिया ह भारी।
कुंवा बाढ़ी म आगे दीदी किसम किसम के तरकारी।।
गोभी, बंधी भाजी, गाजर, मुरई, पालक,चौलई, लालि भाजी , दोड़का, तोरई :-
ए सुवा गीत म सुघ्घर गोभि साग ल राजा के दर्जा दे हावय। दरबारी कस बंधि भाजी ल माने गे हावय। सेना कस मांदा म मुरई, अउ गाजर , पालक, चौलई, अउ लालि भाजी हावय जेन ह एकर सेना कस रक्छा करत हावय। अउ डोड़का तोरई ह तको झुल झुल के बाढ़ी के रखवारी करत ए सुघ्घर लोकगित म बताये गे हावय।
राजा बरोबर फूल गोभीं दिखय , अउ दरबारी कस बंधी भाजी।
सेना कस मांदा म गाजर मुरई खड़े ठाड़े, पालक, चौलाई लाली भाजी।।
झुल झुल झुलना करे दीदी डोड़का तोरई रखवारी।
कुंवा बाढ़ी म आगे दीदी किसम किसम के तरकारी।।
कुम्हडा, रखिया, करोंदा, निमऊ, रमकलिया साग -
ए गीत म सुघ्घर बताये गे हावय कि कुम्हडा अउ रखिया के नार ल मुसवा मन ले बचाए बर छानही म चईघा दिये जाथे, इही ल इंहा दूनों ल आसन जमाए हे कहिके दरसाए हे। खट्टा वाले जिनिस निमऊ करोंदा अउ कुम्हडा के सुघ्घर संगवारी रमकलिया साग ल माने गे हावय।
अम्मठ करोंदा ल निमऊ ल देखे त मुछ मूछ बड़ मुस्काए।।
रमकलिया ह दीदी मोर बने इंकर संगवारी।
कुंवा बाढ़ी म आगे दीदी किसम किसम के तरकारी।।
तरी हरि नाना मोर तरी हरि नाना वो सजगे मरार कुंवा बाढ़ी ।
कुंवा बाढ़ी म आगे दीदी किसम किसम के तरकारी।।





