विजेन्द्र कुमार वर्मा
जान दे कोरी खइरखा लइका बिया डरे हवयI
घर कइसे चलही वो अउ उँखर परिवार जानयI
दवई तो देवत हन काहत हे डाक्टर मन बीमारी केI
ठीक होही कि नइ होही पड़े हे वो बीमार जानयI
बइरी मन ला रोके बर बने हे सरहद मा दीवारI
घुसपैठ रोक पाही कि नइ खड़े हे दीवार जानयI
मेहनत मशक्कत ले होगे हे बंपर पैदावार फसल केI
फसल के बने दाम मिलही ते नइ बाजार जानयI
बात के बतंगड़ कर नइते बात ल मन मा दबाI
खुद उपर हे कइसे करबे तोर व्यवहार जानयI
मजहब के मतभेद ह लड़ई मा उलझ गाँठ बनगे हेI
सुलझाही कोन बइगा गुनिया नइते सरकार जानयI
हम ला जे बात सही लगिस उही ल हम लिखेनI
छपही ते नइ छपही वोला भई अखबार जानयI
नगरगाँव (धरसीवां)
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