मुरारी लाल साव
दूनो मितान बईला बेचे बर निकले रहींस l अपन अपन अंकड़ा बईला के जोड़ी बनाये रहिस l एक ठन भूरवा दुकालू के पिवरा बईला सुकालू के रहिस l बईला जोड़ी आघू आघू पाछू म दूनो मितान गोठ बात करत जात रहिस l सुकालू -"
सब बात तो बन जही लेन देन के l है नहीं l आधा आधा होही बँटवारा ह l फेर मोर बईला म चमक दमक अउ रोठ पोठ हे त
कुछ उपराहा दे देबे मितान,बन जही नहीं l"
दुकालू ठीक हे फेर मोरो ला सुन मोर बईला कंठी माला पहिरे हे थोकिन जादा ज्ञानी समझदार हे तोर बईला अस बईला नइ हे इशारा ला जान डरथे l शास्त्री जी करा ले कंठी माला पहिराये हँव जाने l चमत्कारी कंठी हरे lथोकून उपराहा तहूँ दे देबे l ठीक है ना l नइ ते अंकड़ा अंकड़ा बेच देबो l इही सुझाव बने जंचत हे l
सुकालू कहिस बन जही l लेकिन मोला बता कंठी माला काबर पहिनायहस? बता देना राज के बात l
जेन गुरु बनाथे तेन ला कंठी माला दे जाथे l कंठी माला पहिरे के बाद उही ह गुरु बन जाथे l मोर बईला गुरु बन के देखाही l बिन गुरु के कोनो ला ज्ञान मिले है?
सुकालू -" बईला मन के कोन कान फूंकाथे अउ गुरु बनाथे?
अचरज के बात है l"
कुछ उपराहा दे देबे मितान,बन जही नहीं l"
दुकालू ठीक हे फेर मोरो ला सुन मोर बईला कंठी माला पहिरे हे थोकिन जादा ज्ञानी समझदार हे तोर बईला अस बईला नइ हे इशारा ला जान डरथे l शास्त्री जी करा ले कंठी माला पहिराये हँव जाने l चमत्कारी कंठी हरे lथोकून उपराहा तहूँ दे देबे l ठीक है ना l नइ ते अंकड़ा अंकड़ा बेच देबो l इही सुझाव बने जंचत हे l
सुकालू कहिस बन जही l लेकिन मोला बता कंठी माला काबर पहिनायहस? बता देना राज के बात l
जेन गुरु बनाथे तेन ला कंठी माला दे जाथे l कंठी माला पहिरे के बाद उही ह गुरु बन जाथे l मोर बईला गुरु बन के देखाही l बिन गुरु के कोनो ला ज्ञान मिले है?
सुकालू -" बईला मन के कोन कान फूंकाथे अउ गुरु बनाथे?
अचरज के बात है l"
"कुछु अचरज के बात नइ है l बईला मन गुरु बनाथे चेला बन के भीड़ बढ़ाथे l मोर बईला अपन जोड़ी बनाये हे ओकरो कान ला फूँकत जात हे, समझें l मोर बईला गुरु बन जही तोर बईला चेला, देखबे तो l"
ये दे चोरहा गाँव पहुँच जाथन l उहें पता चल जही l सीहोर जाबो का जी l "
दुकालू -"मोरो बईला ला कंठी माला पहिराये के मन होवत हे l " सकालू कहिस -" मोर बईला सब सीखा दिही l "
सुरजीडीह म रुकबो l सन्तु ला पूछ लेथन l
बर के छाँव म बईला मन ला बांधिस l लेवाल मन आइस देखिस l जबरदस्त जोड़ी हे l कंठी माला वाले बईला तो बड़ सुगघर गुरु बाबा असन दिखत हे l एक झन पूछिस -" का क़ीमत हे जी l"
ये दे चोरहा गाँव पहुँच जाथन l उहें पता चल जही l सीहोर जाबो का जी l "
दुकालू -"मोरो बईला ला कंठी माला पहिराये के मन होवत हे l " सकालू कहिस -" मोर बईला सब सीखा दिही l "
सुरजीडीह म रुकबो l सन्तु ला पूछ लेथन l
बर के छाँव म बईला मन ला बांधिस l लेवाल मन आइस देखिस l जबरदस्त जोड़ी हे l कंठी माला वाले बईला तो बड़ सुगघर गुरु बाबा असन दिखत हे l एक झन पूछिस -" का क़ीमत हे जी l"
" अंकड़ा कि जोड़ी " ""मतलब "
ए गुरु हे अउ ए हा चेला "
चेला बिना गुरु नइ रहय अकेल्ला l"
"जोड़ी बेचना है "
"तीन लाख दे दे l" लेवाल सुन के मुँह फार दीस l
दिव्य दरबार गे हस कभू?इही बीच सुकालू पूछिस - " बड़े बड़े महराज मन के भागवत कथा सुने ला गे रहेस?लेवाल कइथे हौ l बीस लाख -तीस लाख मांगथे l सुने हस ना l "
ओमन पंडित विद्वान ज्ञानी हरे
तोर बईला से ओकर का लेना देना l" "लेना देना हे भाई- ओकरे मन के कंठी माला पहिरे हे l पूरा कथा ला सुने हे सब जानथे l" अरे वाह दिव्य चमत्कार हे तब तो l सुनत सुनत लेवाल के मन होइस l "गाँव भर के मन मिल के ले लेथन l" लेवाल पूछिस तोर कंठी वाले ले कुछ पूंछव का मन के बात?
पूछ के देख l पूछिस -" मोर ददा के ददा के नाँव का रहिस?
बईला लात मारिस अउ मुड़ी हिलाइस l सुकालू बोल के बताइस -" लतखोर " l लेवाल के खुशी के नइ ठिकाना नइ रहिस l हौ हौ एकदम सहीच हे l दूसर लेवाल भूरवा बईला ला पूछिस -" दू लाख म आहू "
ए गुरु हे अउ ए हा चेला "
चेला बिना गुरु नइ रहय अकेल्ला l"
"जोड़ी बेचना है "
"तीन लाख दे दे l" लेवाल सुन के मुँह फार दीस l
दिव्य दरबार गे हस कभू?इही बीच सुकालू पूछिस - " बड़े बड़े महराज मन के भागवत कथा सुने ला गे रहेस?लेवाल कइथे हौ l बीस लाख -तीस लाख मांगथे l सुने हस ना l "
ओमन पंडित विद्वान ज्ञानी हरे
तोर बईला से ओकर का लेना देना l" "लेना देना हे भाई- ओकरे मन के कंठी माला पहिरे हे l पूरा कथा ला सुने हे सब जानथे l" अरे वाह दिव्य चमत्कार हे तब तो l सुनत सुनत लेवाल के मन होइस l "गाँव भर के मन मिल के ले लेथन l" लेवाल पूछिस तोर कंठी वाले ले कुछ पूंछव का मन के बात?
पूछ के देख l पूछिस -" मोर ददा के ददा के नाँव का रहिस?
बईला लात मारिस अउ मुड़ी हिलाइस l सुकालू बोल के बताइस -" लतखोर " l लेवाल के खुशी के नइ ठिकाना नइ रहिस l हौ हौ एकदम सहीच हे l दूसर लेवाल भूरवा बईला ला पूछिस -" दू लाख म आहू "
भूरवा रोंठ पोठ हे अपन चेला के गुन ला बताइस l अपन सिंग म हमेले ला धरिस l दुकालू कहिस -" गुस्सा होगे हे पाँच लाख कहत हे l" कइसे
देख पाँच बार खुर ले खुर्चे हे l"
अब जादा परीक्षा झन लेव l सुकालू समझाइस l गाँव भर म चर्चा फ़ैल गे l आखिर म गाँव वाले मन सकेल के खरीद लेथे l दूनो मितान बईला कोचिंया के भाग खुलगे l कंठी माला के असर ए मितान lगुरु के किरपा ले तोरो बईला पक्का चेला बन गे l गाँव वाले मन जाने समझे lचल निकल इहाँ ले घर म जाके करबो बँटवारा l सुकालू के बात ला मानत दुकालू कंठी माला के नाम लेवत झोला म भर के दूनो निक लगे उत्ता धुर्रा l
अब जादा परीक्षा झन लेव l सुकालू समझाइस l गाँव भर म चर्चा फ़ैल गे l आखिर म गाँव वाले मन सकेल के खरीद लेथे l दूनो मितान बईला कोचिंया के भाग खुलगे l कंठी माला के असर ए मितान lगुरु के किरपा ले तोरो बईला पक्का चेला बन गे l गाँव वाले मन जाने समझे lचल निकल इहाँ ले घर म जाके करबो बँटवारा l सुकालू के बात ला मानत दुकालू कंठी माला के नाम लेवत झोला म भर के दूनो निक लगे उत्ता धुर्रा l
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें