मोहन लाल कौशिक
हिन्दूधर्मी नारि के, तीजा बड़े तिहार।
भाद्र सुदी तिथि तीज के, महिमा अपरंपार।।
शैलसुता हर व्रत रखिस, निर्जल आठों याम।
अर्धांगिनि शिव के बनिस, पूरन होइस काम।।
तिजहारिन मन पूर्व दिन, खाथे ताजा भात।
तेकर सँग खाथे सबे , करू-करेला साग।।
उमा महेश्वर के कथा, सुनथे सब चितलाय।
शिव भोला अनुहार ही, स्वामी रहै सहाय।।
अमर सुहागन ही रहॅव, पति परमेश्वर संग।
मया-प्रीत बाढ़य सदा, झन उतरय ये रंग।।
गिरिजा माँ शिव-शंभु प्रभु, दीजै यह वरदान।
अहिवाती हरदम जिऊँ, मोर होय कल्यान।।
बिलासपुर (छ.ग.)
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