मुकेश उइके "मयारू"
बड़ मनभावन जान लौ, तीजा तीज तिहार।
आथें मइके मा बहिन, पाथें मया दुलार।।
सबो सुहागिन मन सदा, गाथें सुमधुर गीत।
भादो महिना खास हे, पुरखौती ये रीत।।
रखथें जी उपवास ला, पति के सेवा जान।
पावन हे तीजा परब, मिले सुघर वरदान।।
आस लगाके व्रत करैं, करू करेला खाँय।
जप पूजा अउ ध्यान ले, मुँह माँगे वर पाँय।।
पहिरें लुगरा पोलका, टिकली चमके माथ।
चूरी कंगन हे सुघर, लगे महेंदी हाथ।।
घर-घर खुरमी ठेठरी, बनथे सुग्घर आज।
शिव भोला के जाप ले, पूरन होथे काज।।
ग्राम- चेपा, पाली, कोरबा(छ.ग.)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें