संस्कृत की बेटी हिंदी, देश की आन-बान-शान है ।
जैसे माथे पर सजती बिंदी, दुल्हन की पहचान है।।
सरल सहज साधारण भाषा में ही बोली जाती है।
सॅंवारती साहित्य की आशा झोली में ही जाती है।।
संस्कृति को निखारती हिंदी, भारत देश की शान है।
संस्कृत की बेटी हिंदी, देश की आन-बान-शान है ...
रस, छंद, अलंकार से आभूषित, सजती सुंदर काया है।
दोहा, रोला, सोरठा, चौपाई , सुशोभित करती छाया है।
विश्व की श्रेष्ठतम भाषा हिन्दी, दुनिया में महान है।
संस्कृत की बेटी हिंदी, देश की आन-बान-शान है ...
सुर-ताल में बहती हिंदी, निर्मल पावन सरिता है ।
कविवर की कल्पना से, रचित सृजित कविता है।
हमारी मातृभाषा हिंदी, हम सबका अभिमान है।
संस्कृत की बेटी हिंदी, देश की आन-बान-शान है ...
नवोदित रचनाकार
इस अंक के रचनाकार
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बुधवार, 9 अक्टूबर 2024
संस्कृत की बेटी हिंदी है..
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