हिंदी दिवस--- हरिगीतिका छंद
भाखा हमर हिंदी हवय, करलौ सदा अभिमान जी।
बोलव सबो झन शान से, देवव बने सम्मान जी।।
हिंदी अ आ के ज्ञान हे, ये काव्य के संसार गा।
कविता गजल कहिनी मिले, हिंदी हमर आधार गा।।
हे हिन्द के भाखा बने, मधुरस भरे रस घोल लौ।
भाथे सुघर हिंदी सखा, अउ मीठ हरदम बोल लौ।।
हिंदी अबड़ गुरतुर हवय, हिंदी हमर पहिचान गा।
बिंदी वतन के तँय हवस, देवँय सबो झन मान गा।।
मुकेश उइके "मयारू"
ग्राम- चेपा, पाली, कोरबा(छ.ग.)
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