सुशील शर्मा
तेरी पायल मेरे दिल का संगीत है।
मन के झरने से झरता कोई गीत है।
आँगन में छनकती है जब भी पायल
मन के कोने से निकलता नवगीत है।
जब भी कहीं घुंघरू खनकते है।
तेरी पाजेब का लगता संगीत है।
जब भी यादों के साथ मिलता हूँ।
सुनातीं तेरी पायल का गीत है।
तेरी पायल की रुनझुन से लगता है।
तू पिछले जन्मों का मेरा मनमीत है।
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