सुशील शर्मा
गुलाल
हाथ में ले गुलाल देख मुझ को मुस्काई।
रंग रंगे कपाल भांग की मस्ती छाई।
देख रूप सौंदर्य चाँदनी भी शरमाई।
अपलक देखें सभी प्रेम की वो तरुणाई।
बसंत
प्रिय बसंत मुस्काय चुनरिया ओढ़े धानी
सतरंगी हो जाय जिंदगी बड़ी सुहानी
पिया मिलन की आस लिए फिरती है रानी।
मन बांधे उल्लास सजन की प्रेम दीवानी।
लालिमा
लाल लाल रंगीन, शाम देखो मन भाए।
लोहित नीला गगन, लालिमा अंग लगाए।
गोधूलि बेला संग,तारे सब क्षितिज समाए।
चाँद उतर चुपचाप,घर की छत पर चढ़ जाए।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें