इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

गुरुवार, 17 अगस्त 2023

बागडोर

 

बागडोर

- भुवनेश्वर चौरसिया 'भुनेश'


एक बाग का माली मर गया। उसके दो छोटे - छोटे बच्चे थे जो कि अनाथ हो गए। घर की स्थिति ऐसी नहीं कि बचे हुए लोग बिना मेहनत के बैठ कर खा सकें।

एक दिन सुबह - सुबह माली का लड़का जो  करीब पन्द्रह साल का था। बाग में पौधों को पानी दे रहा था। टलहने आने वाले लोगों में से एक ने पूछा, "बेटे, पढ़ने - लिखने की उम्र में ये क्या कर रहे हो ?"

बच्चे ने बड़ी आत्मीयता से बात को समझते हुए बोला, "मेरे पिताजी नहीं हैं। अभी कुछ दिन पूर्व ही उनका स्वर्गवास हो गया। हम तीन लोग हैं। मेरी मां, मैं और मेरी बहन। बहन अभी बहुत छोटी है। पिताजी के रहते मां ने कभी कोई काम घर के अलावा नहीं किया।
  अब घर चलाने के लिए पैसे चाहिए और मेरी पढ़ाई के लिए भी ।  मैं किसी कीमत पर पढ़ाई छोड़ना नहीं चाहता। मेरे पिता जी का लिहाज करते हुए सोसायटी के लोगों ने ये फैसला किया कि मेरे पिता जी की जगह पर, मैं बाग की सिंचाई, निराई और गुड़ाई का काम करूं । काम के एवज में जो पैसे मेरे पिताजी को मिलते थे।वह अब मुझे मिलेंगे ।  साथ में एक आदमी को और रख लिया गया है जो मेरे अलावा इस पार्क की रखवाली और माली का काम करेगा। इससे मेरी पढ़ाई का भी नुकसान नहीं होगा ।
  वैसे भी पिता जी के बाद अब मुझे ही अपने घर की बागडोर संभालनी है ।"

वह व्यक्ति इतनी कम उम्र के बच्चे को अपने घर - परिवार की जिम्मेदारी समझते देख बहुत प्रभावित हुआ । बोला,  "बेटे, मैं तुम्हारी कुछ मदद करना चाहता हूँ  । बताओ, तुम्हें किस तरह की मदद चाहिए ?  मैं उसे पूरी करने की कोशिश करूंगा ।"

बच्चे ने नम्रता से कहा, "धन्यवाद अंकल, बस, आप मुझे हौसला देते रहिएगा।"

और वह ट्यूबवेल का पाइप पकड़ पौधों में पानी देने लगा ।

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भुवनेश्वर चौरसिया "भुनेश"
२८८/२२ गली नंबर ६एच, नियर हनुमान मंदिर गांधी नगर, गुड़गांव हरियाणा:-१२२००२

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