1.
मोम की मानिंद था जो दिल वो आवाँ हो गया
अपना हिन्दुस्तान दुनिया में पशेमां हो गया
कातिलों को जब से हमने रहनुमाई सौंप दी
तब से मुंसिफ़ कातिलों पर ही मेहरबाँ हो गया
एक तिल चेहरे की रौनक थी वो अब इक दाग़ है
आईने का दाग़ जो चेहरे का अफशां हो गया
जी रहे हैं हम सभी आखिर भला उस दौर में
राहजन रहबर हुये दुश्मन भी अब जां हो गया
राम का अब नाम भी कलयुग में यूँ बदनाम है
अपनी जय जयकार सुन वो खुद परेशां हो गया
कुछ दरिन्दों ने महज़ अफवाह फैलाई उधर
जो मेरे दिल का ही टुकड़ा था मुसलमाँ हो गया
2.
हमारे बीच कोई खास मसअला भी नहीं
मगर वो साथ मेरे दो कदम चला भी नहीं
बहुत ही टेढ़ी नज़र से हमें वो देख रहे
न तो है वास्ता जिनसे मुकाबला भी नहीं
लगाये फिरते हैं अपनी नज़र में मीटर वो
करा जो सकते किसी का तबादला भी नहीं
बहुत ही खुश है वो इससे जो आग फैली है
बचा न उसका ही घर और मरहला भी नहीं
रहूँगा साथ हमेशा तुम्हारी खुशियों में
मैं खुश भी हो न सकूँ इतना दिलजला भी नहीं
मेरे ही साथ ये चर्चा है क्यों यहाँ उनका
जो दरमियां था हमारे वो मामला भी नहीं
इस अंक के रचनाकार
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गुरुवार, 17 अगस्त 2023
धर्मेन्द तिजोरीवाले ’ आजाद : दो गजलें
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