जी सिंग
भोलू- गिलु जी हमारी लड़की हीरा है परंतु में उसे 3 कपड़ो में विदा करने वाला हूँ मैं दहेज़ विरोधी हूँ।
गिलु - बिलकुल हम लोग भी दहेज़ विरोधी है और हम भी बस चंद कपड़ों में विदा करने वाले है।
भोलू - मैं समझ नहीं पाया।
गिलु - क्या नहीं समझे ?
भोलू - आपकी तो कोई लड़की है ही नहीं फिर आप किसे विदा करेंगे ?
गिलु - आपकी बात पूरी तरह सही नहीं है परंतु फिलहाल तो मैं बेटे टिल्लू को विदा करने की बात कर रहा हूँ।
भोलू - परंतु टिल्लू तो आपके साथ रहेगा।
गिलु - नहीं भाई टिल्लू को पढ़ा लिखा दिया हीरा बना दिया अब वो जानें। अपनी नौकरी करे कोई काम धंधा करे जो चाहे करे हमारी तरफ से आज़ाद है।
भोलू - लेकिन जो आपने कमाया वो सब तो टिल्लू का ही है। आपका बंगला शोरूम एजेंसी सब का इकलौता वारिस तो टिल्लू है।
गिलु -नहीं भाई वो सब तो मेरा और मेरी घरवाली का है और हम उसे अपने हिसाब से खर्च करेंगे।
भोलू - आपके बाद तो सब टिल्लू का ही है।
गिलु - नहीं हम तो इसे बेदखल कर चुके है और अब हम जो कमाया है इसे खर्च करेंगे और आखिर में जो बचेगा उसे वृदाश्रम को दे जाएंगे ।
भोलू - आप जा सकते हैं, मैं अपनी लड़की किसी भिखमंगे को नहीं दे सकता। मुझे मेरी हैसियत का दामाद चाहिए।
गिलु रू आपने तो मेरी मन की बात कह दी । जय राम जी की
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें