योगेश समदर्शी
आपकी यह हौसला अफजाई बहुत काम आएगी
सच कहता हूं यदि आपने यूं ही दिया साथ तो
वर्षों से रुकी कलम में फिर से जान आएगी
मैं यह तो नहीं कहता कि मैं कोई फोडूंगा भाड़
पर मेरी चटक नाइंसाफी की आंख फोड़ जाएगी
दर्द जो दस्तूर सा बनता रहा तो एक दिन
बदलाव की आंधी भी पूरे वेग से ही आएगी
आज आंसू बह रहे है देख जिनकी आंख में
वक्त की तहजीब है उनको हंसी भी आएगी
वार समझौतों पे गर होते रहे यूं ही तो सुन
प्यार की फसलें बली के खून से लहलाएंगी
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