रविवार, 21 फ़रवरी 2021

मित्र के चले जाने के बाद

जसवीर त्यागी

मित्र के चले जाने के बाद

मैं उसके घर गया

मिला उसके परिवार से

देखते ही मुझे

किसी फव्वारे से फूट पड़े वे

मेरे अंदर रह - रहकर 

घुमड़ता रहा बादलों - सा कुछ

लेकिन! बरस नहीं सका

मित्र की पत्नी को

मैं कुछ कह न पाया

उसके बच्चों से आँख न मिला सका

आने - जाने वाले

दुनियादारी के व्यावहारिक वाक्यों से

पोंछते रहे उनके आँसू।

होनी को कौन टाल सकता है?

समय ही बलवान है

सभी को जाना है देर - सबेर

जरूरत हो तो

याद कीजिएगा जरूर

हम सब हैं

मैं खामोशी के कुएँ में फसा खड़ा रहा 

मृत्यु पर क्या कहा - सुना जाये?

बस यही सोचता रहा।

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