रविवार, 21 फ़रवरी 2021

बड़े दिनों के बाद

रविशंकर पाण्डेय

बड़े दिनों के बाद खिली बगिया
महका आंगन बहका मन का कोना
बड़े दिनों के बाद बही पुरवाई
ले अंगड़ाई छूकर रूप सलोना
बड़े दिनों के बाद कुकी कोयल
बैठी डाली छिपकर सुंदर पात
बड़े दिनों के बाद महकी अलसी
बहकी कलसी पाकर फगुनाहट वात
बड़े दिनों के बाद खिला महुआ
बौराया आम मधुमय हुआ पराग
बड़े दिनों के बाद फुला सेमल
हँसा पलाश होकर सरस सराग
बड़े दिनों के बाद लहराया गेंहू
फूला मटर श्वेत बैगनी - नीला
बड़े दिनों के बाद खिला सरसों
मधुरस लेकर सुंदर पीला -पीला
बड़े दिनों के बाद चहका गुंजन
महका आंगन बहका मन का कोना
बड़े दिनों के बाद जागा राग भाया फाग
सब कुछ लगा सलोना।


रंका बौलिया,गढ़वा (झारखण्ड )

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