मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

तीन कपड़े

जी सिंग

भोलू : गिलु जी हमारी लड़की हीरा है परंतु में उसे 3 कपड़ो में विदा करने वाला हूँ मैं दहेज़ विरोधी हूँ
गिलु - बिलकुल हम लोग भी दहेज़ विरोधी है और हम भी बस चंद कपड़ों में विदा करने वाले है
भोलू - मैं समझ नहीं पाया
गिलु - क्या नहीं समझे
भोलू - आपकी तो कोई लड़की है ही नहीं फिर आप किसे विदा करेंगे
गिलु -आपकी बात पूरी तरह सही नहीं है परंतु फिलहाल तो में बेटे टिल्लू को विदा करने की बात कर रहा हूँ
भोलू - परंतु टिल्लू तो आपके साथ रहेगा 
गिलु - नहीं भाई टिल्लू को पढ़ा लिखा दिया हीरा बना दिया अब वो जानें। अपनी नौकरी करे कोई काम धंधा करे जो चाहे करे हमारी तरफ से आज़ाद है। 
भोलू - लेकिन जो आपने कमाया वो सब तो टिल्लू का ही है। आपका बंगला शोरूम एजेंसी सब का इकलौता वारिस तो टिल्लू है।
गिलु - नहीं भाई वो सब तो मेरा और मेरी घरवाली का है और हम उसे अपने हिसाब से खर्च करेंगे
भोलू -आपके बाद तो सब टिल्लू का ही है
गिलु - नहीं हम तो इसे बेदखल कर चुके है और अब हम जो कमाया है इसे खर्च करेंगे और आखिर में जो बचेगा उसे वृदाश्रम को दे जाएंगे
भोलू - आप जा सकते हैं मैं अपनी लड़की किसी भिखमंगे को नहीं दे सकता। मुझे मेरी हैसियत का दामाद चाहिए।
गिलु - आपने तो मेरी मन की बात कह दी। जय राम जी की ।

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