सोमवार, 23 दिसंबर 2019

दिल तो अब भी रंगीन है,


चित्र में ये शामिल हो सकता है: 2 लोग, लोग खड़े हैं और अंदर
दिल तो अब भी रंगीन है,
पर कम्बख्त उम्र चेहरे से झलकने लगी।
जवानी धीरे धीरे चलती हुई,
बुढ़ापे की तरफ खिसकने लगी।
ख्वाब तो अब भी हसीन आते हैं,
बस नज़रें जरा धुंधलाने लगी।
काली जुल्फों के लहराते आसमान में,
अब थोड़ी चाँदनी जगमगाने लगी।
कदमों में जोश अब भी बरकरार है,
पर मुई साँसें कुछ हाँफती सी आने लगी।
पाक कला पर हाथ आजमाते आजमाते,
निगोड़ी चर्बी भी बदन का लुत्फ उठाने लगी।
समय की पाबंदियों पर सोते थे,
अब फुर्सत के लम्हे जगाने लगे।
शौक जितने थे पुराने दोस्तों,
फिर से गौर उन पर फरमाने लगे।
भूल कर बीते पलों के फसानों को,
सुकून की घड़ियों का आनंद उठाने लगे।
योग साधना की तरफ लगा कर मन,
अपनी सेहत को सेहतमंद बनाने लगे।
बचपन की उन प्यारी सहेलियों से,
हम मजे से खूब बतियाने लगे।
भूल गये थे जिन यादों की गलियों को,
उन गलियों में वापस आने जाने लगे।
फिर से जीना चाहते जिंदगी को,
वक़्त से अपने लिए वक़्त चुराने लगे।
मन भर कर सजते और संवरते हैं,
हम गीत कोई नया गुनगुनानाने लगे।

Alka Baheti

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