बुधवार, 25 दिसंबर 2019

जा रहा हूं


अशोक बाबू माहौर
 
 जा रहा हूँ 

तमाम चीजें 
साथ लेकर मस्तमौला 
चले जा रहा हूँ 
पता नहीं कहाँ? 
किस ओर? 
कलम कागज 
और रोटी का टुकड़ा रखे 
जेब में। 
न मंजिल 
न पथ का भरोसा 
बस पद बढ़ाते 
ओजस्वी मन लिए 
गाता गुनगुनाता 
शब्द जोड़ते 
बढ़ रहा हूँ आगे 
ठीक वैसे ही जैसे हवा में 
भटकता एक कागज का टुकड़ा। 

       परिचय 
संपर्क :ग्राम कदमन का पुरा, तहसील अम्बाह, जिला मुरैना (मप्र) 476111 
मो 8802706980

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