{ प्रदीप छन्द }
जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
कितने अपने रक्षक सैनिक , हरदिन देंगे जान है ।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।
कितने बच्चे अनाथ होंगे , रोज आतंकवाद से ,
कितने मातु-पिता से वंचित , होंगे घर बरबाद से ।
कितने सर के साया खोकर , तड़पेंगे नादान है ।।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।1।।
कितने दृग अश्रु बहायेंगे , खोकर है संतान को ,
कितनी आँखें पथरायेंगी , राह देखते जान को ।
कितनी माँ की गोद शून्य हो , होंगी निःसंतान है ।।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।2।।
कितनी माते तड़प-तड़पकर , होंगी संज्ञा हीन-सी ,
कितनी मैया शीश पटकती , हो जायेंगी दीन-सी ।
कितनी माताएँ धीरज खो , छोड़ेंगीं निज जान है ।।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।3।।
कितने पिता अश्रु पूरित हो , याद करेंगे पुत्र को ,
कितने सीनापर चिपकाकर , देखेंगे बस चित्र को ।
कितने दिन तक हम खोयेंगे , अपने वीर जवान है ।।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।4।।
कितने दिन तक माता-बहनें , पोंछेंगी सिन्दूर को ,
कितनी पीड़ा सहन करेंगी , खोकर नैना नूर को ।
कितने दिन में ढूँढ़ सकेंगी , ये सरकार निदान है ।।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।5।।
कितने बार झेलना होगा , इस आतंकी वार को ,
कितना 'ठाकुर' छन्द गढ़ेगा , शब्दों में दे धार को ।
कितना हमको धोखा देगा , कायर पाकिस्तान है ।।
कितने योद्धा वीर हमारे , देंगे नित बलिदान है ।।6।।
सम्पर्क सूत-9406957763 , 6266524261
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