डॉ सरोजनी डडसेना
भादो महीना के आ गे जी बहार
आवव जी मनाबो भोजली तिहार
भोजली दाई के पीवर पीवर लुगरा
दाई ल मनाबो अउ गाबो भिंसरहा
हलषष्ठी अउ हरियर दिखे भुइयां
देवव आशिष ,पूजव छट मईया
छट भाजी अउ पसहर के चूरे भात
भईस के दही- दूध,चिचोल महुवा के पाग
भादोआठे के जन्मे किसन कन्हैया
झूलना झुलावै नन्द यशोदा मईया
गो धुलही बेरा माखन मटकी फोड़य
गोप ग्वालन कस लइका मन उमड़य
पोरा के मेला ले सजे हावे बजार
माटी के पोरा अउ रंगे हे अवजार
खुरमी ठेठरी गुलगुला के महमही
माटी के पोरा देख लइका मटमटाही
आवत होही लेहे बर नोनी ल भइया
सती सुहागन कस मनाही परबतिया
करू भात खावय घर- घर किंजर के
भोले ल मनाही सबो सखी जुरमिलके
बम्हनीडीह
जांजगीर चाम्पा(छ. ग.)
आवव जी मनाबो भोजली तिहार
भोजली दाई के पीवर पीवर लुगरा
दाई ल मनाबो अउ गाबो भिंसरहा
हलषष्ठी अउ हरियर दिखे भुइयां
देवव आशिष ,पूजव छट मईया
छट भाजी अउ पसहर के चूरे भात
भईस के दही- दूध,चिचोल महुवा के पाग
भादोआठे के जन्मे किसन कन्हैया
झूलना झुलावै नन्द यशोदा मईया
गो धुलही बेरा माखन मटकी फोड़य
गोप ग्वालन कस लइका मन उमड़य
पोरा के मेला ले सजे हावे बजार
माटी के पोरा अउ रंगे हे अवजार
खुरमी ठेठरी गुलगुला के महमही
माटी के पोरा देख लइका मटमटाही
आवत होही लेहे बर नोनी ल भइया
सती सुहागन कस मनाही परबतिया
करू भात खावय घर- घर किंजर के
भोले ल मनाही सबो सखी जुरमिलके
बम्हनीडीह
जांजगीर चाम्पा(छ. ग.)
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