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जीवन का ,
रूप है अनोखा।
हवा का झोंका,
को न समझे धोखा।।
अवसर को ,
समझे मौका।
मन रूपी,
नियंत्रित हो नौका।।
विपत्तियों से,
न होना विचलित।
हवा का झोंका,
है प्रचलित।।
जीव- जंतु से,
सीखें संघर्ष।
हवा का झोंका,
स्वीकार हो सहर्ष।।
धनीराम डड़सेना 'धनी'
छ.ग
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