सुहावत हे सुहावत हे सुहावत हे
किसानी के दिन बादर,एक मन के आगर
चारो मुड़ा हाँसी खुशी छावत हे .........2
बरखा रानी के रुन- झुन
भंवरा ह करय भुन- भून
बिजली ह नाचै छम-छम
बादर ह गरजय घम-घम
इंकर अंसड़हूं बानी भावत हे.......! सुहावत...
भिंदोल ह करय टर- टर
पूरवाही चलय सर- सर
झिंगरा के देखव वो रंगत
गहिरीन कीरा के ये पंगत
डहर डहर माटी ममहावत हे.....! सुहावत...
नांगर बइला अरर -तरर
धान के बांवत छर- छरर
लकर धकर आना जाना
बिधुन हो के गावय गाना
खेत म ददरिया धमकावत हे .....! सुहावत...
सुहावत हे सुहावत हे सुहावत हे
किसानी के दिन बादर,एक मन के आगर
चारो मुड़ा हाँसी खुशी छावत हे .........2
-- राजकुमार मसखरे
इस अंक के रचनाकार
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शुक्रवार, 26 मई 2023
सुहावत हे, सुहावत हे !
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