शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

दलबदल की राजनीति


मदनमोहन मालवीय टेक्नीकल यूनिवर्सीटी द्वारा प्रदत्त टेराकोटा लालटेन जिस पर MMMTU GORAKHPUR ढला हुआ है जिसे देकर सम्मानित किया गया।मेरी कविता मे भी लालटेन आया है।

   जगदीश खेतान

दलगत राजनीति क्या होता
ये मुझसे मत पूछो भाई।
कल तक लालटेन ले घूमे
आज उठा ली दियासलाई।
               जिसको जैसा अवसर मिलता
               वैसा ही वह लाभ उठाता।
               रूखा सूखा कौन चाहता
               सबको चाहिए दूध मलाई।
जो पानी बहता रहता है
वह पानी ही निर्मल होता।
रूके हुये पानी के ऊपर
ही जमती रहती है काई।
                मुल्जिम भला सत्य क्यों बोले
                हवालात को जाना चाहे ?
                देता वही गवाही झूठी
                जिसने शपथ सत्य की खाई।
पहले था आधार टिकट का
जेल और जनता की सेवा।
खर्च न करना पडता था तब
अपने पाकेट से एक पाई।
                प्रत्याशी बनने की खातिर
                होती है अब डाक बुलौवल।
                अवसर आने पर को चूके?
                तुम ही न्याय करो हे भाई।
इतनी बार पार्टियां बदली
याद नही हम कब किसमे थे।
किस किस का करजा लीना था।
किस किस को कर दी भरपाई।
               अस्पताल मे अम्मा ने बेटी रख
                मुझको बदल लिया था।
                अगर पार्टी बदली मैने
                इसमे कौन दोष है भाई।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें