सोमवार, 23 दिसंबर 2019

सुनो अजनबी!

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मुझे हमेशा एक मौन स्वीकृति देना
अपने विचारों को रखने कासुनो अजनबी!
अपनी बातों को कहने का
मुझे या मेरे इन खूबसूरत
एहसासों को कोई विकृति कदाचित ना देना।
और हां! तुम मुझसे कभी कोई उम्मीद मत रखना
ना मुझे किसी उम्मीद से बांधना
क्यूंकि मैंने देखा है,सहा है,उम्मीदों
के आसरे रिश्तों के बड़े बड़े
खूबसूरत महल को ढहते हुए।
तुम कोई आदत मत पालना,
ना मुझे कोई आदत डालना।
क्यूंकि ये आदतें बड़ी जानलेवा होती है।
तुम खूब हंसना, हंसाना
जो दिल करे,करना
कभी कभी बच्चों के साथ बच्चे बन जाना।
ये मशवरा नहीं तजुर्बा है मेरा
ज़िन्दगी को समझदार बनके संवारा तो जा सकता है
लेकिन ज़िन्दगी का लुत्फ उठाने के लिए
बच्चा बनना,पागल बनना पड़ता है।
तुम कभी ना दिल करे तो भी
जोर जोर से गाना,खिलखिलाना
बिना मतलब लोगों के काम आना
तुम्हे सुकून मिलेगा।
तुम कभी फूर्सत के कुछ पल निकालना
सिर्फ अपने लिए
और प्रकृति की छटा निहारना
चांद को गौर से देखना,वो तुमसे
बाते करेगा।
तुम फूलों को सहलाना,वो शरमा जाएंगी।
तुम जुगनू पकड़ना,तुम तितलियों के पीछे भागना।
हां, जानती हूं तुम्हे अटपटा लगेगा
मगर कर के देखना
मेरा दावा है,तुम्हे बहुत अच्छा लगेगा।
तुम कभी कभार अपने लिए जीना।
अपनी खुशियों को अपने अंदर ढूंढ़ना।
अपने आप को खुश रखना।
क्यूंकि तुम किसी के लिए बहुत अनमोल हो
बहुत मूल्यवान हो
बहुत जरूरी हो।
नहीं जानते?
वो किसी तुम स्वयं ही तो हो!
' गुनगुन गुप्ता '

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