सबला आज के नेवता हावे संगवारी।
गाँव भर मिलके मनाबो हमन देवारी।।
सांहड़ा देव मा कर बो गोवर्धन पूजा।
पार ही दोहा ठाकुर मालिक मन भारी।।
जी मर के देवारी मा संगी खुशी मनाथन।
एक दुसर सन हम सुख दुख गोठियाथन।।
गोवर्धन माथ मा लगा के आशीष पाथन।
हाँसत बोलत सब कोई बिछड़ जाथन।।
द्वापर ला सुरता करथन कृष्ण कन्हैया।
बाल गोपाल माखन चोर नाग नथैया।।
इंद्र के अहंकार ला क्षण भर मा तोड़ के।
गोवर्धन पर्वत के नीचे लाके खड़ा करैया।।
कान्हा जब अपन छीनी अंगरी लगाइस।
बाल गोपाल मन देख के लउठी टेकाइस।।
बाड़ ले मनखे संग गऊ माता ला बचाइस।
उही दिन ले गोवर्धन पूजा चालू कराइस।।
छोटे बड़े अउ ऊँच नीच के भेद ला पाटिस।
झन कर जुलुम इखर ऊपर इंद्र ला डाटिस।।
मिलजुल के नाच गा के सब खुशी मनाइस।
भगवान की लीला समझ सब पाँव लागिस।।
गऊ माता ला धोके करबो हम सब सिंगार।
पहिनाही राउत भइया मन सोहई के हार।।
बाज ही दमऊ,दफड़ा,सिंग,मंजीरा मोहरी।
सज के निकल ही पकड़ के तेंदू लाठी सार।।
आज घर- घर हम गोवर्धन पर्वत बनाबो।
मेमरी,सिलयारी,धान फूल ओमा सजाबो।।
दूध,भात,कोहड़ा,कोचई,रोटी भोग लगाबो।
गऊ माता के खुर मा खुंदा के माथ लगाबो।।
साल भर के तिहार ला हँसी खुशी ले मनान।
दारू गाँजा पी के गाँव मा झगड़ा झन मतान।।
कप,पउवा पी के बोतल के नशा झन बतान।
अपन परिवार के मनखे मन ला झन सतान।।
तुलेश्वर कुमार सेन
सलोनी राजनांदगांव
गाँव भर मिलके मनाबो हमन देवारी।।
सांहड़ा देव मा कर बो गोवर्धन पूजा।
पार ही दोहा ठाकुर मालिक मन भारी।।
जी मर के देवारी मा संगी खुशी मनाथन।
एक दुसर सन हम सुख दुख गोठियाथन।।
गोवर्धन माथ मा लगा के आशीष पाथन।
हाँसत बोलत सब कोई बिछड़ जाथन।।
द्वापर ला सुरता करथन कृष्ण कन्हैया।
बाल गोपाल माखन चोर नाग नथैया।।
इंद्र के अहंकार ला क्षण भर मा तोड़ के।
गोवर्धन पर्वत के नीचे लाके खड़ा करैया।।
कान्हा जब अपन छीनी अंगरी लगाइस।
बाल गोपाल मन देख के लउठी टेकाइस।।
बाड़ ले मनखे संग गऊ माता ला बचाइस।
उही दिन ले गोवर्धन पूजा चालू कराइस।।
छोटे बड़े अउ ऊँच नीच के भेद ला पाटिस।
झन कर जुलुम इखर ऊपर इंद्र ला डाटिस।।
मिलजुल के नाच गा के सब खुशी मनाइस।
भगवान की लीला समझ सब पाँव लागिस।।
गऊ माता ला धोके करबो हम सब सिंगार।
पहिनाही राउत भइया मन सोहई के हार।।
बाज ही दमऊ,दफड़ा,सिंग,मंजीरा मोहरी।
सज के निकल ही पकड़ के तेंदू लाठी सार।।
आज घर- घर हम गोवर्धन पर्वत बनाबो।
मेमरी,सिलयारी,धान फूल ओमा सजाबो।।
दूध,भात,कोहड़ा,कोचई,रोटी भोग लगाबो।
गऊ माता के खुर मा खुंदा के माथ लगाबो।।
साल भर के तिहार ला हँसी खुशी ले मनान।
दारू गाँजा पी के गाँव मा झगड़ा झन मतान।।
कप,पउवा पी के बोतल के नशा झन बतान।
अपन परिवार के मनखे मन ला झन सतान।।
तुलेश्वर कुमार सेन
सलोनी राजनांदगांव
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें