इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

सोमवार, 1 सितंबर 2025

कॉफ़ी कैफ़े

 

नीलमणि
 
     लगभग बीस साल बाद तीन पुरानी सहेलियाँ— नीलू, रेखा और कविता कॉफ़ी कैफ़े में मिलीं। कॉलेज के दिनों की मस्ती याद करते-करते बात अचानक पतियों पर आ गई। नीलू हँसते हुए बोली, “मैंने अपने पति को शादी से पहले आठ साल तक जाना, सोचा अब सब समझ लिया। लेकिन शादी के बाद पता चला कि मैं तो उन्हें सिर्फ़ 8% ही जानती थी। नए-नए  रंग रोज़ सामने आते रहे।”
     रेखा ने भी ठंडी साँस भरते हुए कहा, “अरे! मेरे तो सिर्फ़ दो साल की जान-पहचान थी। तब  लगा बहुत कुछ जान लिया है, लेकिन शादी के बाद समझ आया, असल में मैं उन्हें मुश्किल से 2% ही समझ पाई थी।”
      दोनों हँसते-हँसते कविता की ओर देखने लगीं। कविता शांति से कॉफ़ी का घूँट भरते हुए बोली, “तुम दोनों भाग्यशाली हो, कम-से-कम प्रेम का स्वाद तो चखा। मैंने तो अब तक वो स्वाद भी नहीं चखा। हाँ, पति की रोज़-रोज़ एक जैसी आदतों का ‘धैर्य-रस’ ज़रूर पी रही हूँ। बाइस साल से एक ही स्वाद— बिना शक्कर की कॉफ़ी जैसा।”
     तीनों ज़ोर से हँस पड़ीं। नीलू ने मज़ाक में कहा, “लगता है हमारी ज़िंदगी की कॉफ़ी में सबसे अलग स्वाद कविता के पास ही है।”
परिचय –   नीलमणि
निवासी - मवाना रोड, मेरठ (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल नंबर -9412708345
 

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