घर मोहाटी नीम डारा खोंचाये, अब लागे जइसे हवेली।
हरियर लुगरा पहिर के धरती, लगे दुलहिन नवा नवेली।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली .....
नाँगर बख्खर धोवत माँजत, घाट घटोंदा ठेलम ठेली।
लोंदी खवावत नान्हे बाबू, बछरू संग खेलम खेली।।
चीला लहुटावत डोकरी दाई, डेरी हाथ मा धरे कसेली।
देवत हावय बड़े बहुरिया,भर-भर के पौनी पसेरी।।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली..........
बरखा रानी ला बरजबे इंदर देंवता,आँखी हे कजरेली।
ऎती ओती किंजरत हे येसो,जादा करत हे बरपेली।।
साहित रहिहव डीही डोंगर, हूम देवत करत कलोली ।
नानकुन कुरिया हमर दाता,झन फोरे खपरा कवेली।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली..........
अंग लागे के चाला मा बिछले के,ओखी खोजय अलबेली।
आनी- बानी के खेल खेलय,गुड़ी सकलाय सखी सहेली।।
लइका मन ला गेड़ी माँगय खेलय, पारा के टूरी अलबेली ।
छोरी छोरा देख भिरय कछोरा, मोटियार करे बरपेली।
बाँटी भाँवरा रस्साकसी, फुगड़ी डुआ मा पेलम पेली।।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली..........
हरियर लुगरा पहिर के धरती, लगे दुलहिन नवा नवेली।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली .....
नाँगर बख्खर धोवत माँजत, घाट घटोंदा ठेलम ठेली।
लोंदी खवावत नान्हे बाबू, बछरू संग खेलम खेली।।
चीला लहुटावत डोकरी दाई, डेरी हाथ मा धरे कसेली।
देवत हावय बड़े बहुरिया,भर-भर के पौनी पसेरी।।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली..........
बरखा रानी ला बरजबे इंदर देंवता,आँखी हे कजरेली।
ऎती ओती किंजरत हे येसो,जादा करत हे बरपेली।।
साहित रहिहव डीही डोंगर, हूम देवत करत कलोली ।
नानकुन कुरिया हमर दाता,झन फोरे खपरा कवेली।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली..........
अंग लागे के चाला मा बिछले के,ओखी खोजय अलबेली।
आनी- बानी के खेल खेलय,गुड़ी सकलाय सखी सहेली।।
लइका मन ला गेड़ी माँगय खेलय, पारा के टूरी अलबेली ।
छोरी छोरा देख भिरय कछोरा, मोटियार करे बरपेली।
बाँटी भाँवरा रस्साकसी, फुगड़ी डुआ मा पेलम पेली।।
आगे जी आगे सुग्घर,आगे तिहार हरेली..........
रोशन साहू ' मोखला ' (राजनांदगांव)
7999840942
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