इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

रविवार, 11 फ़रवरी 2024

और दूल्हा बिक गया

 मीरा शलभ

     चंद्रकांत जी चादर में मुँह लपेटे... घरवालों से नज़र बचा कर भीतर ही भीतर सिसक रहे थे- रात जब से लड़के वालों के यहाँ से लौटे हैं... उनके घर का माहौल ही बदल गया... घर में ऐसा भयावह सन्नाटा मानों यहाँ मौत हो गयी हो... हर आदमी एक दूसरे से दृष्टि सी चुराए अपने को व्यस्त सा जता रहा है.
     मृणाल की आँखें रो-रोकर लाल सी हो गयीं थीं. आँखों के पपोटे बुरी तरह से सूज गए लेकिन आँसुओं का वेग नहीं थम रहा था. बस कानों में पिता की कराहती हुई आवाज गूंज रही थी... “क्या बताऊँ मृणाल की मां... उन्होंने जबान दे कर हमसे नाता तोड़ लिया... मुझसे पहले वहाँ लड़के का मामा किसी दूसरी पार्टी को लिए बैठा था... मैं गाड़ी से सगाई का सामान उतरवा ही रहा था कि लड़के के पिता लगभग दौड़ते से मेरी ओर लपके ... बोले, बुरा न मानिए ठाकुर साहब... लड़की की कुंडली न होने से हम विवाह न कर सकेंगे.... लेकिन ये बात तो पहले ही आपसे साफ बतला दी गयी थी और लड़के को लड़की भी पसंद है... मैंने ये कहते हुए लड़के की तरफ देखा ... मगर वो चुप सर झुकाए खड़ा रहा ... और यहाँ ऐसा उतावला था कि मानों मृणाल को अभी ब्याह ले जाएगा... सब समझ आ गया मेरी... सब समझ आ गया मृणाल की माँ... दूल्हा बिक चुका था...”

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