जसबीर चावला
बेहद
परेशान थे टीवी चैनल सीसीकेएम (पूरा मतलब चूँ चूँ का मुरब्बा) के सीईओ इन
दिनों.परेशानी का सबब था उनके चैनल की कमाई का गिरता ग्राफ़. दूसरे चैनल
खूब चाँदी काट रहे थे, उनकी टीआरपी भारत सरकार की साख की तरह घट रही थी.
उन्होंने
आनन-फ़ानन में अपने अपने सारे एंकर से लेकर फ़ील्ड
संवाददाता,प्रोड्यूसर,केमरामैन सबकी आपात् बैठक बुलाई.सबको देश में - तेज़ी
से लेकर सुस्त चलने वाले,१० मिनट में २०० ख़बरें परोसने वाले,चैन की नींद
सोने के बहाने जगाने वाले कई चैनलों के कामयाब नुस्खे वाले कार्यक्रम
दिखाये,विशेषज्ञों के भाषण करवाये.
उन्होंने कुछ टीवी क्लिपिंग
दिखलाई,जिनसे उन चैनलों के दिन फिर गये थे.उनमें कुछ के नमूने ये थे."मिल
गया,मिल गया,रावण का महल मिल गया. वह एअरपोर्ट भी मिल गया जहाँ उसका विमान
लेडिंग करता था"- पार्श्व में रामायण सीरियल की धुन बजने लगी."आज रात बाज
बकरी को रात आठ बजे उठा ले जायेगा,देखना न भूलें,आपके अपने
टीवी'इंडिभार'पर".अगला चैनल-"अंतरिक्ष से उड़न तश्तरियाँ आ कर गायों को ले
जा रही हैं,हमारे जाँबाज पायलटों ने हेलिकॉप्टर से पीछा किया पर वे चकमा
देकर भाग गईं"-अगला समाचार-"आकाश से एलियन आ चुके हैं,कहीं आपकी खिड़की से
झाँक तो नहीं रहे उठ कर देख लीजिए"-पार्श्व में खौफनाक संगीत बजता है.
अगला
चैनल-"मिल गया भगवान श्रीकृष्ण का शंख"-नेपथ्य में शंख ध्वनि."मिल गई सीता
की रसोई जहाँ वे भोजन बनाती थी."पार्श्व में रामायण की चौपाईयां.
ख़बरें,बनारस
मे बरगद का पेड़ जिसमें तीन पत्ते लगते हैं-ब्रम्हा विष्णु महेश.जनता पूजा
कर रही है.अगला समाचार -दार्जीलिंग के कुर्सीयांग में एक उड़न तश्तरी
ज़मीन पर गिरी.जमीन पर एक २ फ़ुट लोहे की डिस्क जो किसी मशीन का पुर्ज़ा था
पड़ी थी.वाचक संवाददाता उसे उड़न तश्तरी मान कर चर्चा करने लगे-"लोग डरे
तो नहीं,पूजा शुरू हुई की नहीं"-वाचक चाहता था कि लोग पूजा शुरूं करें तो
कहानी लंबी खिंचे.
"सांई बोलने लगे-आँखें झपकने लगी".दो चैनलों नें
इस एनिमेशन फ़िल्म ओर उसके परम रहस्य को कई दिनों तक दर्शंकों को
समझाया."बंदर जो केवल गोरी लड़कियों का दीवाना है"-"आज सिर्फ़ देखिये हमारे
चैनल पर.बाबा सूर्यदेव की घोषणा-२०१४ में धरति पर प्रलय"- नेपथ्य में
भूकंप की गढ़गढ़ाती आवाज़ें ,समुद्र का गर्जन,भक्त जनों का कीर्तन.
चैनल सीसीकेएम उर्फ़ चूँ चूँ का मुरब्बा के सीईओ ने उन्हें बाबा घासाराम,चरायणसांई,भूतप्रेत,सेक्स,अपराध,अघोरी,तंत्र-मंत्र,धर्म-अध्यात्म के फ़िल्मी काकटेल,आश्रमों हो रही रास लीलाएँ ,अंधिवश्वास के खेल तमाशे कच्चे अधपके चुनावी स्टिंग आप्रेशन और इनसे चैनलों को बढ़ती टीआरपी ओर कमाई,सब की वीडियो दिखलाई.ख़बरें
बनती कैसे है,यह भी उदाहरणों के साथ समझाया.एक खबर की क्लिपिंग में
श्रीनगर के लालचौक में अलगाववादी तिरंगा खरीदते ओर जला देते. अब उनसे कौन
पूछे की भइयै,वहाँ कोई झंडे की दुकान भी है क्या? यह सब अंग्रेज़ी के एक
अख़बार की नक़ली प्रायोजित फ़ोटो थी. "आँखो-देखी" की बिहार में दादाओं
द्वारा बूथ केपचरिंग की स्टोरी गढ़ी हुई थी.बनारस में २ वर्ष पूर्व १५
विकलागों की गुमटियां अतिक्रमण में हटना थी.उन्हें चैनलों ने उकसाया की वे
ज़हर खा लें हम कैमरे से शूट करेंगे,और तुम्हें बचा लेंगे.सबने टीवी पर इसे
देखा.उन्होंने सचमुच ज़हर खा लिया.५ की जान चली गई पर चैनलों की टीआरपी
आसमान छूने लगी.
सीईओ ने चेलेंज किया जो कोई धाँसू स्टोरी - चाहे
गढ़कर लाये चाहे स्टिंग कर के,उसे १० लाख रुपये नक़द और थाईलैंड की सैर पर
भेजा जायेगा.सारे रिपोर्टर दौड़ पड़े -'इस्टोरी'की तलाश में.जिस झारखंडी
रिपोर्टर की स्टोरी चुनकर टेलिकास्ट हुई वह कुछ ऐसी थी.
"मिल
गया,धोनी के चौकों छक्कों का राज.आज रात प्राइम टाईम में ८ बजे चैनल
सीसीकेएम पर.कौन है जो उसे ऊर्जा से भर देती है,कौन है वह
सलोनीश्यामा.जिसका राज धोनी भी नहीं जानता,हम उठायेंगे पर्दा इस रहस्य से
जिसे हमारे संवाददाता कूड़ाप्रसाद नें जान पर खेल कर उठाया है".
क्रिकेट
इस देश का सन्निपात बुखार है और कभी उतरता ही नहीं. सारा देश सदा तपता
रहता है.देश में इस खबर से हलचल मच गई.देश थम गया,चर्चाओं का बाज़ार गर्म
हो उठा.परम जिज्ञासा से सब 'चू चूँ का मुरब्बा'देख रहे थे.
"जी हाँ
धोनी के चौके छक्के के पीछे जिस व्यक्ति का हाथ है वह हैं मुक्तिकुमार
यादव,जिनकी भैंसों का दूध धोनी पीते हैं"- कैमरा मुक्तिकुमार पर फ़ोकस होता
है."ये भैंसें पालते हैं,दूध निकालते हैं,- दूध जो अमृत होता है जिसकी देश
में नदियाँ बहती थी"-मुक्तिकुमार जी गदगद् हैं.पीछे उनकी घरवाली लजाती
सकुचाती नज़र आती है जिस पर केमरा अब फ़ोकस है,जो भैंस का दूध निकाल रही
है.कैमरा कभी मैदान में चरती भैंसों पर जाता है कभी मैदान में क्रिकेट
खेलते चौके छक्के लगाते धोनी पर कभी दूध निकालती मिसेज़ मुक्तिकुमार पर कभी
गिलास से दूध पीते ओर मलाई पोंछते धोनी पर जाता है.बड़ा ही मनोहारी द्रश्य
बनता है.दूध निकालती घरवाली,बाल्टी में झागदार दूध,भैंस,मैदान ओर धोनी के
चौके छक्के..........! तभी मुक्तिकुमार बतलाते हैं की धोनी की फ़ेवरेट भैंस
कोई और ही है....! रहस्य...रोमांच...! रहस्य भरा संगीत....।
स्टूडियो
से वाचक घोषणा करता है- जाइयेगा नहीं हम मिलेंगे ब्रेक के बाद,और
दिखायेंगे उस भैंस ओर तबेले को जिसे मुक्तिकुमार से इजाज़त न मिलने पर भी
'जान पर खेल कर' ढंूड निकाला है,हमारे संवाददाता ने सारा देश टकटकी लगाये
टीवी से चिपका रहा- परम रहस्य से पर्दा जो उठना था.
ब्रेक के बाद
केमरा घोसीपुरा में मुक्तिकुमार के तबेले में घूम रहा है.संवाददाता के
कपड़े गोबर-गंदगी से भरे पड़े हैं.केमरा चारा,रस्सीयां,गोबर,मरियल से बिजली
के लट्टू,टोके,गडासे से होता हुआ भैंसों की क़तार दिखाता हुआ एक ख़ास
श्यामासलोनी 'भैंस' पर टिक जाता है.संवाददाता उवाच-"यही है वह वह अनमोल
प्यारी भैंस जिसका दूध पीकर धोनी रनों की बरसात कर देता है"पार्श्व में
गाना बजता है-"तारीफ़ करूँ क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया".अब केमरा भैंस
की आँखों पर जाता है,रुकता है-गाने की आवाज़-"झील सी इन आँखों में डूब डूब
जाता हूँ".अब केमरा भैंस के सींगों के क्लोज़ से उसकी पूँछ तक मिडशॅाट से
लांग शॅाट में जाता है.वाचक पूछता है -"इसकी उम्र क्या
है"-संवाददाता-""बाली उम्र है"-शरारत से"महिलाओं की उम्र नहीं
पूछते".संवाददाता भैंस के नज़दीक़ हो गया-क्लोजप शॉट-भैंस ने उसका गाल चाट
लिया-संवाददाता लजाता है.भैंस रंभाती है,सारा देश इस अद्भुत कौतुक को देख
तालियाँ बजाता है.
चैनल सीसीकेएम पर यह स्टोरी टुकड़ा टुकड़ा कई
दिनों तक सारा सारा दिन चली टीआरपी उछल कर सातवें आसमान पर चढ़ गई.खूब
विज्ञापन मिले.चैनल निहाल हो गया.रिपोर्टर को १० लाख रुपये और बैंकाक में
सुंदरियों से मसाज का अवसर मिला -उसके पहले बोनस में गोआ ट्रिप अलग से.
जैसे उस "चूँ चूँ का मुरब्बा" तथा उस रिपोर्टर के दिन फिर सब चैनलों के दिन फिरें.
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