डॉ. रश्मि दुबे
साधारण सी दिखने वाली अदना सी कलमकार हूं मैं
हर विषय का माहौल बना दूं कुछ ऐसी कि चित्रकार हूं मैं
कभी प्यार हूं अपने प्रिय का,कभी अपनों का दुलार हूं मैं
कभी किसी सामाजिकता में , कोई सलाहकार हूं मैं
देश विदेश के हाल सुनाऊं , हां स्वतंत्र पत्रकार हूं मैं
कभी किसी कोने में बैठी ,सखियों की राजदार हूं मैं
सीमा पर बैठे जो सैनिक ,उन दिलों की ललकार हूं मैं
कभी किसानों की बोली बन,सरकारी तलब गार हूं मैं
प्रत्येक विषय प्रत्येक हाल पर,कलम हमेशा ही चलती है
कभी किसी की सरपरस्त हूं ,कभी किसी पर वार हूं मैं
गाजियाबाद
इस अंक के रचनाकार
.
मंगलवार, 29 नवंबर 2022
कलमकार हूं मै
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें