इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

सोमवार, 15 जुलाई 2013

स्थापना


- अखिलेश शुक्ल -
वे नगर सेठ हैं। कई मिलों के मालिक, कारखाने चल रहे हैं, आढत है। उनका नगर में रूतबा है। स्थानीय संस्थाओं, पुलिस तथा प्रशासन में तूती बोलती है। किसी की भी क्या मजाल कि चूं चपड़ कर सके।
उस रविवार स्थानीय समाचार पत्र में नगरपालिका का टेण्डर छपा था। उनके घर के सामने से बहने वाले अधूरे नाले के निर्माण कार्य पूर्ण करने की छोटी सी निविदा थी वह।
वह निविदा स्वीकृत हुई। निर्माण कार्य की तैयारी भी प्रारंभ हुई। लेकिन नाले का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
वजह! सेठ जी ने नाले के किनारे, अपने विशाल भवन की चहारदीवारी के पास हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना जो कर रखी थी।
  • पता - संपादक कथा चक्र,63ए तिरूपति नगर,इटारसी 461111 ( म.प्र.) मो. 09229532367

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