इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

गुरुवार, 20 जून 2013

गहरी खाई

  • दिनेश चौहान 
हालांकि वह सेठ का बहुत पुराना मुलाजिम था। पर उसे कोई रहम नहीं आया। जब उसने उस  ईमानदार मुलाजिम को बिना सूचना के नौकरी से अलग कर दिया। दरअसल उसके एक भाई को पुलिस ने एक चोरी के इल्जाम में पकड़ लिया था।
- सेठ, चोरी मेरे भाई ने की है। वह भी पुलिस के मुताबिक किसी दूसरे शहर में। उसके अपराध की सजा अदालत उसे सुनाएगी, पर आप मुझे किस अपराध में नौकरी से अलग कर रहे हैं ?
- अरे भाई मुझे तुमसे बहस नहीं करना है, मैं चोर के भाई को अपने यहां नौकरी में नहीं रख सकता।
मुलाजिम ने अंतिम प्रयास के रूप में एक उदाहरण और प्रस्तुत करते हुए कहा - सेठ आपको भी पता है। बनवारीलाल के बेटे ने एक खून कर दिया था, पर सरकार ने तो उसे नौकरी से अलग नहीं किया। अलबत्ता उसका बेटा जेल में सजा काट रहा है।
- तो जाओ न, सरकारी नौकरी ढूंढ लो। मेरा सिर क्यों खा रहे हो।
यह कहकर सेठ ने सिक्यूरिटी गार्ड को इशारा कर दिया कि उसे धक्का देकर बाहर कर दे। अब वह बेरोजगार मुलाजिम भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकार में अपना वजूद खोज रहा है पर वह उसे असमानता की गहरी खाई में कहीं भी दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है।
  • पता - शीतला पारा, नवापारा, राजिम (छग)

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