इस अंक के रचनाकार

इस अंक के रचनाकार आलेख खेती-किसानी ले जुड़े तिहार हरे हरेलीः ओमप्रकाश साहू ' अंकुर ' यादें फ्लैट सं. डी 101, सुविधा एन्क्लेव : डॉ. गोपाल कृष्ण शर्मा ' मृदुल' कहानी वह सहमी - सहमी सी : गीता दुबे अचिंत्य का हलुवा : राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल एक माँ की कहानी : हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन अनुवाद - भद्रसैन पुरी कोहरा : कमलेश्वर व्‍यंग्‍य जियो और जीने दो : श्यामल बिहारी महतो लधुकथा सीताराम गुप्ता की लघुकथाएं लघुकथाएं - महेश कुमार केशरी प्रेरणा : अशोक मिश्र लाचार आँखें : जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी तीन कपड़े : जी सिंग बाल कहानी गलती का एहसासः प्रिया देवांगन' प्रियू' गीत गजल कविता आपकी यह हौसला ...(कविता) : योगेश समदर्शी आप ही को मुबारक सफर चाँद का (गजल) धर्मेन्द्र तिजोरी वाले 'आजाद' कभी - कभी सोचता हूं (कविता) : डॉ. सजीत कुमार सावन लेकर आना गीत (गीत) : बलविंदर बालम गुरदासपुर नवीन माथुर की गज़लें दुनिया खारे पानी में डूब जायेगी (कविता) : महेश कुमार केशरी बाटुर - बुता किसानी/छत्तीसगढ़ी रचना सुहावत हे, सुहावत हे, सुहावत हे(छत्तीसगढ़ी गीत) राजकुमार मसखरे लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की रचनाएं उसका झूला टमाटर के भाव बढ़न दे (कविता) : राजकुमार मसखरे राजनीति बनाम व्यापार (कविता) : राजकुमार मसखरे हवा का झोंका (कविता) धनीराम डड़सेना धनी रिश्ते नातों में ...(गजल ) बलविंदर नाटक एक आदिम रात्रि की महक : फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी से एकांकी रूपान्तरणः सीताराम पटेल सीतेश .

सोमवार, 24 जून 2013

कलयुगी अमृत , आम इमली

  • आचार्य सरोज व्दिवेदी 
समुद्र मंथन के बाद जो अमृत का घड़ा निकला, उसके लिए देवासुर संग्राम हुआ। विष्णुजी की कला से सारा अमृत देवतागण पी गए फिर भी राक्षस लड़ते रहे और घड़ा फोड़ डाले, घड़े में अमृत की कुछ बूंदें फिर भी बाकी थी। जिन्हें रौंद डाला गया। विष्णु जी जब जाने लगे तो घड़े के टुकड़ों पर फैले अमृत कणों ने निवेदन  किया, प्रभु आपने अमृत को बड़ा ऊंचा स्थान दिया है। किंतु हमारी यहां बड़ी दुर्गति हुई है, अब तो हमें उबार लीजिए।
- चिंता मत करो, भगवान विष्णु ने कहा - यहां पर एक पौधा उगेगा जो धीरे - धीरे फैलता जाएगा। इन पौधों की पत्तियों से कलयुग में एक पेय बनाया जाएगा जो अमृत की तरह ही होगा। लोग प्रतिदिन उसका सेवन करेंगे और अतिथि सत्कार भी करेंगे। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि लोग उस पेय को उसी तरह के बर्तनों में ग्रहण करेंगे जैसे ये घड़े के टुकड़े फूटे पड़े हैं इसे पूरे संसार में ख्याति मिलेगी।
कुछ लोग कहते हैं कि विष्णु जी का वह वरदान चाय है।
आम इमली
नेता - देखो, चमचामल जी, इस गोल हरे फल को लोग आम कहते हैं जबकि मैं कहता हूं कि यह इमली है लेकिन लोग मेरी बात ही नहीं मानते । हमको कुछ समझते ही नहीं।
चमचामल - हुजूर, यहीं तो लोकतंत्र मार खाता है। लोग आम को समझते हैं, इमली कहने वाले को नहीं। लेकिन आपने जब कह दिया तो यह इमली ही है। आम हो ही नहीं सकता और सिद्ध करना मेरा काम है।
नेता जी- शाबाश चमचामल, हमें तुमसे यही उम्मीद थी। लोगों को तुम बता दो कि यह आम नहीं इमली हैं क्योंकि हम बोल रहे हैं।
जनता - यह आम है और वह नेता का बच्चा बोलता है कि यह इमली है।
चमचामल - आप लोग शांत रहे। आम को इमली कोई नहीं बना सकता। नेता जी को भ्रम हो गया है समय आने पर सत्य सामने आ जाएगा।
अधिकारी - चमचामल जी, नेताजी इसे इमली बोल रहे हैं और जनता कहती है कि यह आम है। अब आप ही बताइए कि हम इस पर कैसे कार्यवाही करें।
चमचामल - अजी आप लोग पढ़े - लिखे जरूर हैं लेकिन समझते कुछ नहीं अधिकारी लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच की कड़ी है और ठीक कड़ी वही है जो किसी का पक्ष न ले आपको न आम से मतलब न इमली से। लिख दीजिए - खट्टा फल।
  • ज्‍योतिष कार्यालय, तुलसीपुर , राजनांदगांव (छग)

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